हरियाणा में लव मैरिज विवाद पर सरपंच की सफाई

बोले- कोई रोक या बहिष्कार नहीं; संस्कृति बचाने की अपील

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हिसार , 23  सितंबर 2026 । हरियाणा के हिसार जिले के आर्य नगर गांव में प्रेम विवाह को लेकर सामने आई खबरों के बाद अब गांव के निर्वाचित सरपंच ने स्थिति स्पष्ट की है। मीडिया रिपोर्टों में गांव की सामाजिक पंचायत द्वारा प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के सामाजिक बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, गांव के सरपंच रतन सिंह ने कहा है कि इस फैसले में निर्वाचित ग्राम पंचायत की कोई भूमिका नहीं है।

सरपंच के स्पष्टीकरण के बाद विवाद का एक अहम पहलू सामने आया है। एक तरफ सामाजिक पंचायत की बैठक में गांव के युवक-युवतियों के बीच होने वाले प्रेम विवाह को लेकर आपत्ति जताई गई, वहीं दूसरी तरफ निर्वाचित पंचायत ने खुद को इस निर्णय से अलग बताया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रविवार को हुई पंचायत में केवल हाल ही में विवाह करने वाले युवक-युवती के अभिभावकों की सहमति से यह बात रखी गई थी कि गांव की मर्यादा और संस्कृति को बचाए रखने के लिए एक ही गांव के लड़का-लड़की आपस में शादी न करें। भविष्य में इस परंपरा को बनाए रखने के लिए किसी सामाजिक बहिष्कार के बजाय केवल जागरूकता अभियान ही चलाया जाएगा।

सरपंच बोले- निर्वाचित पंचायत ने नहीं लिया ऐसा फैसला

आर्य नगर के सरपंच रतन सिंह ने स्पष्ट किया कि सामाजिक पंचायत में लिए गए निर्णय को निर्वाचित ग्राम पंचायत का आदेश नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक बैठक में ग्रामीणों ने अपनी सामाजिक चिंताओं पर चर्चा की थी, लेकिन ग्राम पंचायत ने प्रेम विवाह पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया है।

सरपंच के इस बयान से यह अंतर महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी सामाजिक बैठक में व्यक्त राय और किसी वैधानिक ग्राम पंचायत के आधिकारिक निर्णय को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।

‘संस्कृति बचाने’ की बात, लेकिन बहिष्कार पर अलग-अलग दावे

ग्रामीणों की ओर से यह तर्क दिया गया कि गांव में युवक-युवतियों को सामाजिक रूप से भाई-बहन की तरह देखा जाता है और प्रेम विवाह की बढ़ती घटनाओं से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर ग्रामीणों के एक वर्ग ने ऐसे विवाहों को हतोत्साहित करने की बात कही।

वहीं, सामाजिक बहिष्कार को लेकर भी रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स और दैनिक जागरण ने सामाजिक पंचायत के प्रस्ताव में बहिष्कार की बात रिपोर्ट की है, जबकि NDTV से बातचीत में स्थानीय बीजेपी नेता हनुमान वर्मा ने सामाजिक बहिष्कार के प्रस्ताव से इनकार किया।

यही वजह है कि मामले में सामाजिक पंचायत की बैठक और निर्वाचित ग्राम पंचायत के रुख को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लिया

मामला सामने आने के बाद हिसार के पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने कहा कि पुलिस स्थिति पर नजर रखेगी और ऐसे जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इससे साफ है कि प्रशासन के स्तर पर भी मामले को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति या परिवार को धमकी, दबाव या हिंसा का सामना न करना पड़े, यह कानून-व्यवस्था का विषय बन जाता है।

वयस्कों के विवाह के अधिकार पर कानूनी स्थिति

भारतीय संविधान के तहत वयस्क व्यक्ति को अपनी पसंद के जीवनसाथी का चुनाव करने के अधिकार को अदालतों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कमल आनंद ने भी कहा कि सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार है और सामाजिक बहिष्कार संबंधी आदेशों की कोई स्वतंत्र कानूनी वैधता नहीं होती।

इसलिए किसी सामाजिक संगठन या पंचायत की राय और कानून के तहत लागू होने वाले अधिकारों के बीच अंतर बना रहता है।

अब क्या है गांव का रुख?

फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार आर्य नगर में प्रेम विवाह को लेकर सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। ग्रामीणों का एक वर्ग पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और संस्कृति की बात कर रहा है, जबकि निर्वाचित ग्राम पंचायत ने ऐसे किसी आधिकारिक प्रतिबंध से दूरी बनाई है।

इस मामले में आगे प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई औपचारिक निर्देश आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यही स्पष्ट है कि ‘लव मैरिज पर सरकारी या निर्वाचित ग्राम पंचायत की ओर से प्रतिबंध’ और ‘सामाजिक पंचायत में प्रेम विवाह को लेकर लिया गया निर्णय’—दोनों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।

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