पटना , 21 सितंबर 2026 । बिहार की राजधानी पटना में रविवार को आयोजित लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा कि “एक हैं तो सेफ हैं, बंटेंगे तो कटेंगे।” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार समेत कई नेता मौजूद थे।
यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब बिहार की राजनीति में सामाजिक समूहों की एकजुटता और एनडीए के घटक दलों के बीच तालमेल को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, कुशवाहा के बयान को किसी विशेष चुनावी सीट या उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
पटना में हुआ ‘ लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह ‘
दरअसल, बिहार की राजधानी पटना स्थित बापू सभागार में राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। प्रोग्रेसिव बुद्धिजीवी एसोसिएशन, बिहार द्वारा आयोजित इस ‘लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह’ में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं और एक महिला अधिकारी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री शीला कुमारी की मौजूदगी रही। इस महामंथन में नेताओं ने लव-कुश समीकरण के महत्व, सामाजिक एकजुटता और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर अपने विचार व्यक्त किए।
मंच पर सम्राट चौधरी ने दिया ‘पांच पांडव’ का फॉर्मूला
उपेंद्र कुशवाहा के संबोधन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सामाजिक और राजनीतिक एकता की बात रखी। उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों को ‘पांच पांडव’ की संज्ञा देते हुए एकजुटता का संदेश दिया।
सम्राट चौधरी ने पांच उंगलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग रहने पर उनकी ताकत सीमित होती है, जबकि मुट्ठी बनने पर ताकत बढ़ती है। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी एनडीए की एकजुटता का उल्लेख किया।
निशांत कुमार की मौजूदगी भी रही चर्चा में
कार्यक्रम में निशांत कुमार की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। वह बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं। इससे एक दिन पहले जेडीयू के एक आधिकारिक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में निशांत कुमार ने पार्टी विधायकों को संबोधित किया था।
उस कार्यक्रम में निशांत ने नीतीश कुमार की नीतियों और शासन मॉडल को जनता के बीच रखने की अपील की थी। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भी तारीफ करते हुए कहा था कि वह नीतीश कुमार के आदर्शों और शासन मॉडल का अनुसरण कर रहे हैं।
बिहार की राजनीति में कुर्मी और कुशवाहा समुदायों को कई वर्षों से ‘लव-कुश’ सामाजिक समीकरण के तौर पर संदर्भित किया जाता रहा है। रविवार के कार्यक्रम का नाम भी इसी सामाजिक पहचान पर आधारित था।
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में 1994 के लव-कुश सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की सामाजिक एकता ने आगे चलकर राजनीतिक स्वरूप लिया। उन्होंने बिहार की प्रगति के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कही।
उपेंद्र कुशवाहा के बयान का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
कुशवाहा का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में अलग-अलग सामाजिक समूहों को राजनीतिक रूप से संगठित करने और गठबंधन के भीतर समन्वय पर चर्चा होती रही है। कार्यक्रम में सामाजिक एकता का संदेश देने के साथ-साथ एनडीए के घटक दलों की एकजुटता का भी उल्लेख हुआ।
हालांकि, “बंटेंगे तो कटेंगे” जैसे नारे के इस्तेमाल को किसी एक चुनावी सीट या आगामी चुनाव के लिए किसी विशेष रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं कहा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मुख्य रूप से एकता और सामाजिक समन्वय के संदेश के रूप में दर्ज किया गया है।
कुशवाहा ने सम्राट चौधरी के कार्यकाल पर भी बात की
कार्यक्रम के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पद पर बने रहने को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी जिस कुर्सी पर बैठे हैं, वहां उनका बने रहना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जनता के समर्थन पर निर्भर है। उन्होंने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के सफर को संघर्ष से जोड़कर बताया।
इस पूरे कार्यक्रम में सामाजिक एकता, बिहार के विकास और एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय जैसे विषय प्रमुख रहे।