पटना , 16 सितंबर 2026 । बिहार की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर एक बार फिर गठबंधन की संभावनाओं और सियासी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC को लेकर दिए बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड को NDA से अलग होकर उसके साथ आने का प्रस्ताव दिया। RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने सार्वजनिक तौर पर नीतीश कुमार से BJP का साथ छोड़कर उनके साथ सरकार बनाने की अपील की। हालांकि, JDU की तरफ से इस प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संख्या बल का खेल
एक कहावत है कि ‘आ पड़ोसन पुए पो लें, क्या लग जागा तेरा। आटा, घी, शक्कर तेरी, घास,फूस,चूल्हा मेरा।’राजद के सरकार बनाने के प्रस्ताव को बिहार के राजनीतिक गलियारों में कुछ ऐसा ही माना जा रहा है। ऐसी बात नहीं कि राजद की तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव पहले नहीं आया। और सरकार भी दो बार बनी। पहली बार जब जदयू ने महागठबंधन का दामन पकड़ा तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 80 विधायक थे और जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)] के 71 विधायक थे। सरकार बन गईं, पर यह गठबंधन 2015 से 2017 के बीच तक ही टिक पाया। दूसरी बार जब जदयू ने महागठबंधन के साथ मिल कर सरकार चलाई, तब अगस्त 2022 से जनवरी 2024 के बीच दोनों दलों की गठबंधन की सरकार चली। तब राजद के 75 विधायक थे और जदयू के 43 विधायक। भाई वीरेंद्र को ये जानना चाहिए कि अब राजद को जनता का वह समर्थन प्राप्त नहीं। अभी जनता दल यू 85 और राजद के पास मात्र 25 विधायक हैं।
RJD ने नीतीश कुमार को क्यों दिया सरकार बनाने का ऑफर?
UCC को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस उस समय तेज हुई, जब अमित शाह ने 2029 से पहले बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही। इसके बाद RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि नीतीश कुमार पहले UCC को लेकर अपनी आपत्तियां जता चुके हैं, इसलिए उन्हें BJP का साथ छोड़कर RJD के साथ सरकार बनानी चाहिए।
RJD की ओर से यह तर्क दिया गया कि JDU और RJD की राजनीति में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों को महत्व दिया जाता रहा है। इसी आधार पर पार्टी ने नीतीश कुमार को साथ आने का न्योता दिया।
JDU का जवाब क्या है?
JDU की ओर से फिलहाल RJD के प्रस्ताव को स्वीकार करने के संकेत नहीं मिले हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने UCC को लेकर कहा है कि अभी प्रस्तावित कानून के प्रावधान सामने नहीं आए हैं। उनका कहना है कि विधेयक आने के बाद उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा और फिर पार्टी स्तर पर चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा।
इससे यह स्पष्ट है कि JDU ने UCC पर तत्काल कोई अंतिम रुख घोषित नहीं किया है। ऐसे में RJD का सरकार बनाने का प्रस्ताव और JDU का उस पर प्रतिक्रिया न देना, दोनों अलग-अलग राजनीतिक प्रक्रियाएं हैं।
85 विधायक बनाम 25 विधायक का गणित
JDU और RJD के बीच मौजूदा विधानसभा संख्या का अंतर भी इस राजनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। NBT की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान विधानसभा में JDU के पास 85 विधायक हैं, जबकि RJD के पास 25 विधायक हैं।
इससे पहले दोनों दल अलग-अलग मौकों पर साथ सरकार बना चुके हैं। 2015 में महागठबंधन सरकार बनी थी, जबकि 2022 में JDU ने BJP से अलग होकर RJD के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन मौजूदा विधानसभा के आंकड़े पिछली दोनों परिस्थितियों से अलग हैं।
नीतीश और लालू के बीच पुराना राजनीतिक समीकरण
नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की राजनीति का रिश्ता कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। दोनों दलों ने 2015 में गठबंधन किया और फिर 2022 में भी साथ आए। हालांकि, 2017 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर BJP के साथ सरकार बनाई थी। 2024 में भी उन्होंने महागठबंधन छोड़कर NDA के साथ सरकार बनाई।
यही राजनीतिक इतिहास मौजूदा दौर में RJD के किसी नए प्रस्ताव को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। JDU और RJD के बीच पहले बने गठबंधन लंबे समय तक कायम नहीं रहे हैं। इसलिए किसी नए गठबंधन की संभावना केवल बयानबाजी से तय नहीं होती, बल्कि नेतृत्व, संख्या बल और साझा राजनीतिक एजेंडे जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करती है।
UCC बना बिहार की राजनीति का नया मुद्दा
UCC को लेकर NDA के भीतर भी अलग-अलग रुख सामने आए हैं। JDU ने कहा है कि वह विधेयक के वास्तविक प्रावधान सामने आने के बाद फैसला करेगा। LJP (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी व्यापक चर्चा और प्रस्तावित मसौदे को सार्वजनिक करने की जरूरत बताई है।
वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने UCC के विचार का समर्थन किया है। इससे साफ है कि बिहार में इस मुद्दे पर सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक चर्चा जारी है।
क्या RJD का ऑफर तुरंत कोई बड़ा बदलाव ला सकता है?
फिलहाल उपलब्ध बयानों से किसी तत्काल गठबंधन परिवर्तन का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। RJD की तरफ से नीतीश कुमार को साथ आने का सार्वजनिक प्रस्ताव जरूर दिया गया है, लेकिन JDU ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह NDA छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में UCC के बहाने नए सियासी संवाद के रूप में देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में UCC के प्रस्तावित प्रावधान, JDU की आधिकारिक रणनीति और NDA के घटक दलों की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दे होंगे।
बिहार की राजनीति में आगे क्या?
UCC के मुद्दे ने एक साथ कई राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। RJD नीतीश कुमार को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है, जबकि JDU ने फिलहाल कानून के वास्तविक प्रावधानों का इंतजार करने की बात कही है। वहीं NDA के अन्य सहयोगी भी अपने-अपने रुख सामने रख रहे हैं।
ऐसे में बिहार की राजनीति में आने वाले समय में UCC सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि गठबंधन की राजनीति और दलों की रणनीति का भी महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। हालांकि, किसी गठबंधन परिवर्तन की पुष्टि तभी होगी जब संबंधित दल औपचारिक रूप से अपना निर्णय घोषित करें।