पटना, 16 सितंबर 2026। बिहार की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच RJD नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने JDU और उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि UCC के मुद्दे पर JDU भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रही है। दूसरी ओर JDU ने कहा है कि वह UCC के प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही अपना अंतिम रुख तय करेगी।
संजय झा ने पार्टी को बर्बाद कर दिया: तेजस्वी
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद ) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाने से हिचकिचाकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ‘भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की मौजूदा स्थिति के लिए तेजस्वी यादव ने उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से कहा, ‘संजय झा ने जदयू को बर्बाद कर दिया है। वो भाजपा की इच्छा के अनुसार पार्टी चला रहे हैं। अब जदयू केवल भाजपा के इशारे पर काम करती है। इस मामले में भी वही हुआ है।’
UCC पर JDU में क्या चल रहा है?
JDU का रुख इस समय पूरी तरह एकतरफा नजर नहीं आ रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि पार्टी UCC विधेयक के वास्तविक प्रावधानों का अध्ययन करेगी। उनका कहना है कि यदि प्रस्ताव में कोई आपत्तिजनक प्रावधान नहीं हुआ तो पार्टी केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करेगी।
वहीं JDU नेता श्याम रजक ने इससे अलग रुख रखते हुए कहा था कि नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संसद में विधेयक का समर्थन करने के बावजूद बिहार में UCC लागू करने का विरोध किया जाएगा। इस वजह से पार्टी के भीतर और सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
RJD और JDU के बीच पुरानी राजनीतिक कहानी
नीतीश कुमार और RJD के बीच राजनीतिक संबंध कई बार बदले हैं। दोनों दल 2015 में महागठबंधन के साथ सत्ता में आए थे। इसके बाद नीतीश कुमार ने BJP के साथ सरकार बनाई और 2022 में फिर RJD के साथ गठबंधन किया। बाद में 2024 में JDU एक बार फिर NDA में शामिल हो गई।
इस राजनीतिक इतिहास की वजह से जब भी BJP और JDU के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद की चर्चा होती है, RJD की ओर से नीतीश कुमार को लेकर बयान सामने आ जाते हैं। हालिया UCC विवाद में भी यही पैटर्न दिखाई दे रहा है, हालांकि किसी नए गठबंधन को लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
RJD को नीतीश में क्या नजर आ रहा है?
RJD के लिए नीतीश कुमार केवल एक विपक्षी नेता नहीं हैं, बल्कि बिहार की गठबंधन राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक धुरी रहे हैं। ऐसे में JDU और BJP के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद की स्थिति बनने पर RJD के नेताओं की नजर स्वाभाविक रूप से उस राजनीतिक समीकरण पर रहती है।
UCC के मामले में RJD खुलकर विरोध कर रही है, जबकि JDU विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन करने की बात कह रही है। यही अंतर RJD को JDU पर राजनीतिक हमला करने का अवसर देता है। तेजस्वी का ताजा बयान इसी अंतर को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
BJP के लिए भी UCC बड़ा मुद्दा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में NDA शासित राज्यों में 2029 तक UCC लागू करने की बात कही है। इसके बाद बिहार में NDA के सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं चर्चा में आ गईं। JDU ने जहां विधेयक के प्रावधानों को देखने की बात कही, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं ने बिहार में इसे लागू करने का विरोध किया है।
इससे बिहार में UCC का मुद्दा सिर्फ कानून से जुड़ी बहस नहीं रह गया है। यह NDA के भीतर सहयोगी दलों की राजनीतिक स्थिति और विपक्ष की रणनीति से भी जुड़ गया है।
क्या तेजस्वी का हमला नीतीश को साधने की रणनीति है?
तेजस्वी यादव के ताजा बयान को दो स्तरों पर समझा जा सकता है। पहला, RJD UCC के विरोध को मजबूत राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है। दूसरा, वह JDU और BJP के संबंधों को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
हालांकि, यह कहना कि इस बयान से नीतीश कुमार और JDU के राजनीतिक गठबंधन में कोई बदलाव निश्चित रूप से होने वाला है, अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल JDU NDA में बनी हुई है और UCC पर उसका अंतिम रुख प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर चर्चा के बाद स्पष्ट होने की बात कही गई है।
बिहार में UCC पर आगे क्या?
आने वाले दिनों में UCC के प्रस्तावित प्रावधान और JDU की आधिकारिक रणनीति सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि JDU अपना रुख स्पष्ट करती है, तो RJD और अन्य विपक्षी दल उसी आधार पर अपनी राजनीतिक रणनीति आगे बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल तेजस्वी यादव ने UCC को लेकर JDU पर निशाना साध दिया है और संजय झा को भी सीधे तौर पर घेरा है। दूसरी ओर JDU ने जल्दबाजी के बजाय विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन करने की बात कही है। ऐसे में बिहार की राजनीति में UCC आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति और दलों के बीच बयानबाजी का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।