2027 से पहले प्रिया सरोज की चिंता, बोलीं- ‘थाने तक में फोन नहीं कर पाऊंगी’, SDM तक मेरी बात नहीं सुनेगा
जौनपुर, 12 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच सांसद प्रिया सरोज का एक बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने 2027 के बाद की संभावित राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो ऐसी स्थिति आ सकती है जब उनकी बात प्रशासनिक स्तर पर भी नहीं सुनी जाएगी।
प्रिया सरोज ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी सांसद प्रिया सरोज मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र में लगातार इन दिनों घूम रही हैं। पार्टी की गतिविधियों को तेज करने में जुटी हुई हैं। इसी दौरान एक कार्यक्रम में उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2027 में अगर समाजवादी पार्टी की सरकार प्रदेश में नहीं बनी तो आपकी बेटी थाने में फोन नहीं कर पाएगी आपके लिए, यह ध्यान रखिए। 2027 में अगर सपा की सरकार नहीं बनी तो आपके लिए डीएम-एसडीएम से आपके लिए बात नहीं कर पाउंगी।
‘SDM तक मेरी बात नहीं सुनेगा’
प्रिया सरोज ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में SDM स्तर तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी। उनके बयान से साफ है कि वह चुनाव के बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर अपनी स्थिति और क्षेत्र में प्रशासनिक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
2027 के चुनाव पर सबकी नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। सत्तारूढ़ दल के साथ विपक्षी पार्टियां भी संगठन को मजबूत करने, मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण साधने में जुटी हैं।
ऐसे में नेताओं के बयान भी लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहे हैं। प्रिया सरोज का ताजा बयान भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
बयान ने बढ़ाई सियासी चर्चा
प्रिया सरोज के बयान में प्रशासन और राजनीतिक प्रभाव का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने जिस अंदाज में थाने और SDM स्तर पर अपनी बात नहीं सुने जाने की आशंका जताई, उससे यह सवाल भी उठ रहा है कि 2027 के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे।
हालांकि, उनके बयान का वास्तविक राजनीतिक संदर्भ और इसके पीछे की परिस्थितियां उनके पूरे वक्तव्य और स्थानीय राजनीतिक स्थिति के आधार पर ही स्पष्ट होंगी।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ेगी बयानबाजी
2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। नेताओं की ओर से प्रशासन, कानून-व्यवस्था, अधिकारियों की कार्यशैली और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े मुद्दे उठाए जा सकते हैं।
प्रिया सरोज का बयान भी इसी राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि उनके बयान पर सत्तापक्ष और विपक्ष के अन्य नेताओं की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और यह मुद्दा चुनावी राजनीति में कितना बड़ा रूप लेता है।