हांसी , 09 सितंबर2026 । भिवानी-महेंद्रगढ़ से भाजपा सांसद चौधरी धर्मबीर के बेटे मोहित चौधरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मोहित चौधरी ने कहा कि वह खुद इस आंदोलन में शामिल हुए थे। भाजपा सांसद के बेटे के आंदोलन में शामिल होने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
पहचान छिपाकर आंदोलन में पहुंचने की बात
Gen-Z आंदोलन की शुरुआत युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर हुई थी। पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा आंदोलन में शामिल हुए।
अब बीजेपी सांसद के बेटे के इस खुलासे ने आंदोलन की राजनीतिक पहुंच को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि वह अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना प्रदर्शन का हिस्सा बने थे। इसी वजह से उन्होंने टोपी और मास्क का इस्तेमाल किया।
Gen-Z आंदोलन के दौरान यह बात सामने आई थी कि बीजेपी और एनडीए से जुड़े कुछ नेताओं के बच्चे भी छात्रों के समर्थन में दिखाई दिए। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सारंगी और पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने भी आंदोलन या उससे जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखी थी। असम सरकार में मंत्री और असम गण परिषद के नेता केशव महंता की बेटी दिबिसा भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुई थीं।
इससे यह बहस शुरू हुई कि क्या Gen-Z आंदोलन को केवल किसी एक राजनीतिक विचारधारा से जोड़कर देखा जा सकता है। आंदोलन में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के युवाओं की मौजूदगी ने इसे व्यापक चर्चा का विषय बनाया।
पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुआ था विरोध
दिल्ली का Gen-Z आंदोलन मुख्य रूप से पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में आया था। छात्रों और युवाओं ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं। इसके बाद यह मुद्दा केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सरकार के साथ उनके संवाद का विषय भी बन गया। दिल्ली बीजेपी नेताओं ने बाद में कहा कि नई पीढ़ी की सोच को समझने और उसके साथ संवाद बढ़ाने की जरूरत है।
BJP नेताओं के बच्चों की भूमिका पर भी हुई चर्चा
आंदोलन में बीजेपी से जुड़े परिवारों के युवाओं की भागीदारी सामने आने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल उठे। कुछ नेताओं ने अपने बच्चों की राजनीतिक गतिविधियों को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बताया।
आजतक की रिपोर्ट में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बालिग होने के बाद बच्चों के विचारों और कार्यों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसी तरह बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने अपनी बेटी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर स्पष्टीकरण दिया था।
Gen-Z आंदोलन ने यह सवाल भी खड़ा किया कि भारत की युवा पीढ़ी राजनीतिक मुद्दों को किस तरह देख रही है। सोशल मीडिया के दौर में युवा केवल चुनावों के दौरान ही राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं होते, बल्कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों जैसे मुद्दों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया देते हैं।
बीजेपी नेताओं ने भी Gen-Z की बदलती सोच को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दिल्ली बीजेपी के नेताओं ने कहा था कि युवा अपनी बात खुलकर रखना चाहता है और सरकार तथा राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी के साथ संवाद का तरीका बदलना होगा।
खुलासे के बाद क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?
बीजेपी सांसद के बेटे का आंदोलन में शामिल होने का खुलासा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह आंदोलन सरकार और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं की नाराजगी से जुड़ा था। अब जब बीजेपी से जुड़े एक सांसद के परिवार के सदस्य ने खुद आंदोलन में मौजूद रहने की बात कही है, तो इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बढ़ना स्वाभाविक है।
हालांकि, किसी आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक स्थिति को साबित नहीं करता। इस मामले को संबंधित व्यक्ति के व्यक्तिगत विचार और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के संदर्भ में देखना भी जरूरी है।
Gen-Z आंदोलन ने सरकार और राजनीतिक दलों के सामने एक नई चुनौती रखी है। युवा अब केवल राजनीतिक भाषण सुनने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नीतियों और फैसलों पर सवाल भी उठा रहे हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल भी युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने और उनकी अपेक्षाओं को समझने पर जोर दे रहे हैं।
बीजेपी सांसद के बेटे का यह खुलासा इसी व्यापक बहस के बीच सामने आया है। अब देखना होगा कि उनके बयान पर पार्टी या अन्य राजनीतिक दलों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।