नई दिल्ली, 09 सितंबर2026 । दिल्ली में हालिया कार्रवाई के कारण जिन लोगों के घर या ठिकाने उजड़ गए हैं, उनके लिए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बने रहने का रास्ता साफ किया है। आयोग के मुताबिक सिर्फ इस वजह से कि किसी व्यक्ति का पुराना पता अब अस्तित्व में नहीं है, उसका मतदाता अधिकार खत्म नहीं होगा। ऐसे विस्थापित लोग नया पता दर्ज कराने के लिए Form-8 का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरी की जा सकती है।
हाल ही में वोटर अधिकार मंच की ओर से इस मुद्दे पर एक ज्ञापन दिया गया था। इस पर सीईओ दफ्तर ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 19 के तहत वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए व्यक्ति का उस क्षेत्र का ‘सामान्य निवासी’ होना जरूरी है। अगर व्यक्ति किसी वजह से पुराने पते पर नहीं है, तो वह पता बदलने के लिए फॉर्म-8 में आवेदन कर सकता है।
30 सितंबर तक दावा करने का मौका
रिपोर्ट के अनुसार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान करीब 47.5 लाख लोगों को सूची से बाहर किया गया है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके पते में बदलाव हुआ है या जिनके पुराने आवास अब मौजूद नहीं हैं। ऐसे मतदाताओं को दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के तहत अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया है।
जिन लोगों को उनके पुराने पते को लेकर नोटिस मिला है, वे 30 सितंबर तक Form-8 भरकर नया पता अपडेट कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग संबंधित जानकारी की जांच कर मतदाता सूची में नाम बनाए रखने या स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी करेगा।
Form-8 से कैसे बदलेगा पता?
Form-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में पहले से दर्ज मतदाता के पते में बदलाव या निर्वाचन क्षेत्र के भीतर अथवा दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरण जैसी स्थिति में किया जाता है। उजाड़े गए इलाकों के ऐसे निवासी, जो अब किसी दूसरे स्थान पर रह रहे हैं, अपने नए निवास का विवरण देकर मतदाता रिकॉर्ड अपडेट करा सकते हैं।
इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति का पुराना मकान टूट जाने या उसे वहां से हटना पड़ने मात्र से उसका मतदान का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। जरूरी यह है कि वह अपनी नई स्थिति की जानकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा करे।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प
चुनाव आयोग ने विस्थापित मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को केवल ऑनलाइन माध्यम तक सीमित नहीं रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक Form-8 ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी सुविधा मिलेगी जिन्हें डिजिटल माध्यम से आवेदन करने में परेशानी होती है।
मतदाता पंजीकरण और संबंधित सेवाओं के लिए चुनाव आयोग का आधिकारिक पोर्टल भी ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराता है। आयोग के अनुसार मतदान के लिए व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है।
विस्थापन के बाद वोटर लिस्ट में नाम बचाना क्यों जरूरी?
किसी इलाके से हटाए जाने के बाद सबसे बड़ी समस्या यह हो सकती है कि मतदाता के पुराने पते और वास्तविक निवास स्थान में अंतर हो जाए। ऐसे में रिकॉर्ड अपडेट नहीं कराने पर मतदाता सूची में नाम को लेकर परेशानी पैदा हो सकती है।
चुनाव आयोग की ओर से Form-8 का विकल्प दिए जाने का उद्देश्य ऐसे लोगों को अपने नए पते के आधार पर मतदाता रिकॉर्ड अपडेट कराने का अवसर देना है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि विस्थापन के कारण किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे में विस्थापित लोगों को अपना नाम मतदाता सूची में जांचना और जरूरत पड़ने पर समय सीमा के भीतर दावा या सुधार करना महत्वपूर्ण हो गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार मतदान का अधिकार तभी इस्तेमाल किया जा सकता है जब मतदाता का नाम संबंधित Electoral Roll में दर्ज हो। इसलिए जिन लोगों का पता बदल गया है, उनके लिए समय रहते रिकॉर्ड अपडेट कराना अहम है।
क्या करना चाहिए?
जिन लोगों के पुराने घर या बस्ती अब मौजूद नहीं हैं, उन्हें सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है या नहीं। अगर पता बदल गया है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-8 के जरिए नए पते की जानकारी देनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदन करते समय सही और सत्यापन योग्य जानकारी दी जाए। निर्धारित अंतिम तारीख 30 सितंबर से पहले प्रक्रिया पूरी करना ऐसे मतदाताओं के लिए अहम है, जिन्हें अपने पुराने पते को लेकर नोटिस मिला है।