देहरादून, 08 सितंबर2026 । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बच्चों को दृष्टि, आत्मविश्वास, संस्कार और जीवन-मूल्य देने का काम करता है। उनके अनुसार एक शिक्षक कक्षा में केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह’ प्रतिभाओं को पहचान देने और शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में भागीदार बनना है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य तय करने और मेहनत, अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल शिक्षकों के सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल उसकी आर्थिक मदद करना नहीं, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में सहभागी बनना है।
शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन पर जोर
सीएम धामी ने शिक्षकों से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और जीवन-मूल्य देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, खिलाड़ी, उद्यमी और प्रशासनिक अधिकारी बनेंगे। ऐसे में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को बच्चों के लिए समय निकालने, उन्हें अनुशासन और अच्छे संस्कार देने तथा हर परिस्थिति में सकारात्मक मार्गदर्शन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में स्कूल और परिवार दोनों की बराबर भूमिका है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का किया जिक्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर भी ध्यान दे रही है।
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भी शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। कार्यक्रम में शिक्षकों के सम्मान और विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने के जरिए शिक्षा तथा प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आने वाली असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।