नई दिल्ली, 07 सितंबर2026 । दिल्ली पुलिस ने नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से कथित ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह जॉब प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाश रहे लोगों का डेटा हासिल करता था और फिर टेलीकॉलर्स के जरिए उन्हें नौकरी का ऑफर देकर संपर्क किया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, सात एटीएम, डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, मोबाइल नंबरों वाले तीन नोटपैड और 6,730 रुपये कैश बरामद किया है। जांच में टाटा मोटर्स के फर्जी जॉइनिंग लेटर और QR कोड भी मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सतीश चंदर मौर्या उर्फ करण उर्फ हरीश (30), बिंदिया उर्फ माही (20), प्रीति उर्फ सुप्रिया (22), प्राची उर्फ स्वीटी उर्फ नेहा (19) और राधिका उर्फ भूमि उर्फ अंशु (19) के रूप में हुई है। सतीश ने M.Sc किया है और एक्सिस बैंक में काम कर चुका है। बिंदिया BA कर रही है, जबकि प्रीति ने 11वीं तक पढ़ाई की है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की DCP निहारिका भट्ट ने बताया कि 1 सितंबर को AATS नॉर्थ की टीम को सूचना मिली थी कि झरोदा माजरा के संगम विहार इलाके में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है।
रजिस्ट्रेशन से मेडिकल तक के नाम पर वसूली
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन, मेडिकल जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जैसे अलग-अलग चरणों के नाम पर पैसे लिए। नौकरी की जरूरत और नामी कंपनियों में चयन के लालच को आधार बनाकर बेरोजगार युवाओं को कथित तौर पर जाल में फंसाया जाता था।
सैकड़ों युवाओं को निशाना बनाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह ने बड़ी संख्या में नौकरी तलाश रहे युवाओं को निशाना बनाया। पुलिस अब ठगी की कुल रकम, पीड़ितों की संख्या और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। इन उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस कॉल सेंटर के संचालन, डेटा के स्रोत और पैसों के लेनदेन से जुड़े सुराग जुटाने में लगी है।
नौकरी तलाशने वालों के लिए बड़ा सबक
यह मामला दिखाता है कि ऑनलाइन जॉब प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी साझा करने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी कंपनी के नाम पर नौकरी का ऑफर मिलने पर उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट और कंपनी के अधिकृत भर्ती माध्यम से इसकी पुष्टि करनी चाहिए। नौकरी देने से पहले रजिस्ट्रेशन, इंटरव्यू, मेडिकल या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे मांगना धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।