बिहार में CM चेहरे को लेकर NDA में बढ़ी बेचैनी

चिराग पासवान के दावे से मांझी विवाद ने पकड़ा सियासी रंग

0

पटना, 05 सितंबर2026 । बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज हो गई हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता राजू तिवारी ने दावा किया है कि चिराग पासवान बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। पार्टी नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर नेतृत्व और सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज है।

हालांकि, चिराग पासवान को एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक चेहरा घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और नेतृत्व को लेकर दिए गए दावे के तौर पर देखा जा रहा है।

हमें चिराग पासवान को सीएम बनाना है: राजू तिवारी

दरअसल पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक राजू तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक ने चिराग पासवान की मौजूदगी में खुले मंच से बड़ा ऐलान किया। राजू तिवारी ने कहा कि चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी का संगठन लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने अगले विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की सरकार बनाने और चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया है।

मांझी और चिराग के बीच आरक्षण पर टकराव

चिराग पासवान और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी के बीच पिछले दिनों आरक्षण के मुद्दे पर खुलकर मतभेद सामने आए। विवाद दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर और वंचित अनुसूचित जाति समूहों के लिए अलग व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर बढ़ा।

मामला इतना आगे बढ़ा कि चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग तक कर दी। इससे एनडीए के भीतर दो प्रमुख दलित नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई।

क्या विवाद का असर बिहार की राजनीति पर पड़ेगा?

चिराग और मांझी दोनों का बिहार में अपना सामाजिक और राजनीतिक आधार है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी को केवल व्यक्तिगत मतभेद के रूप में नहीं देखा जा रहा। यह विवाद दलित राजनीति में नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा और एनडीए के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों की भूमिका से भी जुड़ा माना जा रहा है।

अगर यह टकराव आगे बढ़ता है तो इसका असर सीट बंटवारे, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। हालांकि, एनडीए नेतृत्व के स्तर पर इस विवाद को किस तरह संभाला जाता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

चिराग के दावे का राजनीतिक संदेश

चिराग पासवान की पार्टी की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री पद का संभावित चेहरा बताना कई राजनीतिक संकेत देता है। यह पार्टी के बढ़ते आत्मविश्वास और बिहार की सत्ता में बड़ी भूमिका की इच्छा को दर्शाता है। वहीं, इस दावे से भाजपा और एनडीए के दूसरे सहयोगी दलों के बीच नेतृत्व को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती है।

राजनीति में किसी सहयोगी दल के नेता द्वारा मुख्यमंत्री पद पर दावा करना गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जाता है। हालांकि अंतिम फैसला गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

मांझी फैक्टर क्यों महत्वपूर्ण है?

जीतन राम मांझी लंबे समय से बिहार की दलित राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनका राजनीतिक आधार खासतौर पर मुसहर समुदाय से जुड़ा माना जाता है। दूसरी ओर चिराग पासवान की राजनीति पासवान समुदाय के साथ-साथ व्यापक दलित और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही है।

ऐसे में दोनों नेताओं के बीच आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद सामने आना चुनावी राजनीति के लिहाज से अहम है। यही वजह है कि हालिया विवाद को बिहार में दलित नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

NDA के सामने क्या चुनौती?

एनडीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग सहयोगी दलों के हितों को एक साथ साधने की होगी। एक तरफ चिराग पासवान की पार्टी मुख्यमंत्री पद को लेकर दावा कर रही है, दूसरी तरफ मांझी के साथ आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक मतभेद सामने आ चुके हैं।

ऐसे में गठबंधन को चुनावी मैदान में उतरने से पहले नेतृत्व, सामाजिक समीकरण और सीटों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रणनीति बनानी होगी। फिलहाल चिराग के मुख्यमंत्री बनने का दावा राजनीतिक बयान है, लेकिन इससे बिहार एनडीए की अंदरूनी राजनीति जरूर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.