सीवान गोलीकांड में रायबरेली कनेक्शन से बढ़ी सियासी हलचल

राहुल गांधी के लिए क्यों अहम हुआ मामला? घायलों से दिल्ली में मुलाकात

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पटना , 05 सितंबर2026 । बिहार में नीट मुद्दे को लेकर हुए आंदोलन और बिहार बंद के दौरान सीवान में पुलिस कार्रवाई और फायरिंग का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। घटना में घायल युवकों ने दिल्ली पहुंचकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। कांग्रेस के मुताबिक, घायलों ने पुलिस लाठीचार्ज और फायरिंग को लेकर अपनी आपबीती राहुल गांधी के सामने रखी।

रायबरेली का आकाश यादव कैसे आया सीवान?

रायबरेली का आकाश यादव 25 जुलाई को नीट आंदोलन के समय कैसे सीवान पहुंच गया? रायबरेली के आकाश यादव की उम्र 22 साल है। उसकी मंगेतर सीवान में रहती है। आकाश अपनी मंगेतर के साथ अपना जन्मदिन मनाने रायबरेली से सीवान आया था। आकाश के बयान के मुताबिक, घटना के दिन वह जन्मदिन का केक लेने बाजार जा रहा था। इस बीच पत्थरबाजी होने लगी तो वह किनारे खड़ा हो गया। वह सड़क की तरफ देख ही रहा था कि अचानक उसके बाएं कंधे पर गोली लग गयी। आकाश यादव के मुताबिक, इलाज के दौरान उसे अपनी मंगेतर के घर रहना पड़ा था।

क्या है रायबरेली कनेक्शन?

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रायबरेली के रहने वाले आकाश कुमार हैं। आकाश भी सीवान में हुए घटनाक्रम के दौरान घायल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, वह रायबरेली से बिहार के छात्र आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे और पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगने से घायल हुए। इससे सीवान की घटना का सीधा संबंध राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से जुड़ गया।

आकाश का मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि वह कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने वाले पीड़ितों में शामिल हैं। इससे कांग्रेस को बिहार के छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को उत्तर प्रदेश के रायबरेली तक जोड़ने का अवसर मिला है।

घायलों को दिल्ली क्यों जाना पड़ा?

रिपोर्ट के अनुसार, सीवान के घायल युवक मोहम्मद आरिफ और बुलेट कुमार गौड़ दिल्ली पहुंचे, जबकि रायबरेली के आकाश कुमार अपने घर से सीधे दिल्ली पहुंचे। इसके बाद तीनों ने राहुल गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने उनकी पूरी बात सुनी और आश्वासन दिया कि मामले को संसद में उठाया जाएगा।

इससे पहले घायलों को इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सांसद पप्पू यादव ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की थी। कांग्रेस की ओर से पीड़ितों को आर्थिक और अन्य सहायता देने की बात भी कही गई है।

राहुल गांधी के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?

रायबरेली से जुड़े घायल छात्र की मौजूदगी इस मामले को राहुल गांधी के लिए और ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है। आकाश से राहुल गांधी पहले ही फोन पर बात कर चुके थे। उस बातचीत में आकाश ने अपनी चोट और इलाज की जानकारी दी थी। राहुल गांधी ने उस समय छात्रों की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ने की बात कही थी।

अब दिल्ली में घायलों से आमने-सामने मुलाकात के बाद कांग्रेस के पास इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का राजनीतिक आधार भी मजबूत हुआ है। पार्टी इसे छात्रों, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही से जोड़कर देख रही है।

AK-47 फायरिंग का मुद्दा भी उठा

घायलों ने राहुल गांधी के सामने पुलिस फायरिंग से जुड़े गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उन्हें बताया गया कि घटना के दौरान AK-47 से फायरिंग करने वाले एक पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया है, जबकि पिस्टल से गोली चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए।

यह पहलू मामले को और संवेदनशील बनाता है। हालांकि, फायरिंग की परिस्थितियों, जिम्मेदारी और कार्रवाई को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा आधिकारिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।

कांग्रेस इसे संसद में उठाने की तैयारी में

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि घटना को संसद में उठाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी सहयोग किया जाएगा।

ऐसे में सीवान गोलीकांड आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति के साथ-साथ संसद में भी चर्चा का विषय बन सकता है। खासकर चुनावी माहौल में पुलिस कार्रवाई, छात्र आंदोलन और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए अहम हो सकते हैं।

बिहार से रायबरेली तक कैसे पहुंचा मुद्दा?

सीवान में हुई घटना स्थानीय स्तर पर शुरू हुई थी, लेकिन घायलों में रायबरेली के छात्र की मौजूदगी ने इसे दो राज्यों और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से जोड़ दिया। राहुल गांधी के साथ मुलाकात के बाद यह मामला अब केवल सीवान की कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस इसे छात्र अधिकार और पुलिस जवाबदेही के सवाल के रूप में भी उठा सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राहुल गांधी इस मामले को संसद में किस रूप में उठाते हैं और बिहार सरकार की ओर से इस पर क्या जवाब सामने आता है।

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