सहारनपुर कलेक्ट्रेट की 70 साल पुरानी मस्जिद पर चला बुलडोजर
कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने ढहाया ढांचा
सहारनपुर , 05 सितंबर2026 । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार तड़के ध्वस्त कर दिया। करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
सरकारी जमीन पर निर्माण को लेकर था विवाद
मस्जिद को लेकर मुख्य विवाद जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता से जुड़ा था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में परिसर की जमीन को सरकारी मानते हुए मस्जिद के निर्माण को अवैध कब्जे से जुड़ा माना था और उसे हटाने का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ जिला अदालत में अपील की थी।
जिला अदालत ने भी खारिज की अपील
मस्जिद पक्ष को जिला अदालत से भी राहत नहीं मिली। 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई
संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। ध्वस्तीकरण के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती।
कार्रवाई से पहले बढ़ी थी हलचल
मस्जिद को हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद शुक्रवार रात से ही इलाके में हलचल बढ़ गई थी। प्रशासन ने लोगों को मौके पर जमा होने से रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई की आलोचना की है। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर जाने की कोशिश के बीच उन्हें कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर भी सामने आई।
अदालत के आदेश के अनुपालन का प्रशासन का दावा
प्रशासन की ओर से कार्रवाई को अदालत के आदेश के अनुपालन के तौर पर बताया गया है। पूरे मामले में जमीन के सरकारी होने और निर्माण की वैधता को लेकर न्यायिक प्रक्रिया चली, जिसके बाद जिला अदालत ने भी मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी। हालांकि मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।