नई दिल्ली, 04 सितंबर2026 । लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी लौट आई। BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 फीसदी की बढ़त के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं NSE का निफ्टी भी 24.25 अंक चढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंच गया।
शुरुआती तेजी के बाद ऊपरी स्तरों से फिसला बाजार
कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 76,883.14 और निफ्टी ने 24,005.75 का उच्च स्तर छुआ। हालांकि ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के चलते दोनों प्रमुख सूचकांक अपने दिन के उच्च स्तर से नीचे बंद हुए। इसके बावजूद बाजार ने लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों से मिला सहारा
शुक्रवार की तेजी में फाइनेंशियल सर्विसेज और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों की भूमिका अहम रही। फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में बढ़त दर्ज हुई, जबकि प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी हरे निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में बजाज फिनसर्व, BEL, इंडिगो, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टाइटन समेत कई शेयरों में मजबूती रही।
टाटा स्टील और रिलायंस पर नजर
बाजार की तेजी में टाटा स्टील और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों में खरीदारी ने भी सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की। मेटल सेक्टर में विशेष मजबूती देखने को मिली और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 1.07 फीसदी चढ़ा।
IT और फार्मा सेक्टर पर दबाव
हालांकि पूरे बाजार में तेजी रही, लेकिन सभी सेक्टर हरे निशान में नहीं रहे। IT, फार्मा, हेल्थकेयर, ऑटो और रियल्टी जैसे कुछ सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। इससे संकेत मिलता है कि शुक्रवार की तेजी व्यापक होने के बावजूद बाजार में सेक्टरवार प्रदर्शन अलग-अलग रहा।
ग्लोबल बाजारों से भी मिला सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार को एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का भी फायदा मिला। एशिया के प्रमुख बाजारों में तेजी रही, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी प्रमुख सूचकांक भी बढ़त के साथ बंद हुए थे। वैश्विक बाजारों की मजबूती ने घरेलू निवेशकों की धारणा को सहारा दिया।
निवेशकों के लिए कैसी रही कारोबारी तस्वीर
शुक्रवार की तेजी ने बाजार को लगातार चार सत्रों की गिरावट से कुछ राहत दी। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, विदेशी निवेश और सेक्टरवार खरीदारी बाजार की दिशा के लिए अहम रहेंगे।