Gen Z और Gen Alpha की आवाज दबाने से नहीं चलेगा काम

बिहार के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने सरकारों को दी नसीहत

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पटना, 27 अगस्त 2026 । बिहार के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने Gen Z और Gen Alpha पीढ़ी को लेकर सरकारों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनी जानी चाहिए। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में अधिक जागरूक है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अपनी बात मजबूती से रखने के लिए तैयार है।

मीडिया की स्वतंत्रता पर चर्चा

शिवानंद तिवारी ने कहा कि इसलिए जब सत्ता मीडिया पर बंदिश लगाने की कोशिश करती है, तो उसका नुकसान केवल मीडिया या जनता का नहीं होता, सत्ता का भी होता है। अगर सरकार तक जनता की वास्तविक परेशानी नहीं पहुंचेगी, तो उसके भीतर असंतोष धीरे-धीरे जमा होता रहेगा। बाहर से सब कुछ शांत दिखाई दे सकता है, लेकिन भीतर असंतोष बढ़ता रहेगा और किसी दिन वह अचानक विस्फोट का रूप ले सकता है। इसलिए स्वतंत्र मीडिया जनता के लिए जितना जरूरी है, सत्ता के लिए भी उतना ही जरूरी है। सत्ता में बैठे लोगों को इस बात को समझना चाहिए।

आवाज दबाने से नहीं निकलेगा समाधान

शिवानंद तिवारी ने लोकतंत्र में जनता की आवाज और मीडिया की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी असहमति को दबाने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उनके मुताबिक सरकारों को युवाओं की चिंताओं और सवालों को गंभीरता से सुनने की जरूरत है।

Gen Z और Gen Alpha को समझने की जरूरत

नई पीढ़ी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में बड़ी हो रही है। ऐसे में Gen Z और Gen Alpha के बीच सूचनाओं तक पहुंच और अपनी राय व्यक्त करने की क्षमता काफी बढ़ी है। शिवानंद तिवारी का संदेश है कि सरकारों को इस बदलते सामाजिक और तकनीकी माहौल को समझते हुए युवाओं के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए।

छात्रों पर लाठीचार्ज का भी उठाया सवाल

शिवानंद तिवारी ने हाल में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी सवाल उठाए और सरकार की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज को सुनना जरूरी है।

मीडिया की स्वतंत्रता पर जोर

उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि स्वतंत्र मीडिया जनता की समस्याओं और सवालों को सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके मुताबिक पूरी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने और बदलते दौर के अनुरूप सरकारों को अपनी कार्यशैली पर मंथन करने की जरूरत है।

शिवानंद तिवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब युवा वर्ग की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ रही है। उनका कहना है कि सरकारों को नई पीढ़ी की आवाज को दबाने के बजाय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए उनकी चिंताओं को समझना चाहिए।

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