नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 । बिहार सरकार ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नया निर्देश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक, यदि किसी विधायक या सांसद का फोन अधिकारी किसी कारणवश नहीं उठा पाते हैं, तो उन्हें काम खत्म होने के बाद खुद जनप्रतिनिधि को कॉल बैक करना होगा। सरकार ने साफ किया है कि जनप्रतिनिधियों के फोन और पत्रों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से लिखा गया पत्र
अफसरों के प्रोटोकॉल को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों से कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के पद और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए। इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है।
17 जुलाई को स्पीकर ने वरीय पदाधिकारियों के साथ की थी बैठक
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के प्रति राज्य के सभी अधिकारी अपेक्षित प्रोटोकॉल एवं शिष्टाचार का अनुपालन करें। सरकार के पत्र में कहा गया है कि 17 जुलाई 2026 को विधानसभा अध्यक्ष ने वरीय पदाधिकारी की बैठक ली थी। जिसमें विधायकों के प्रति अपेक्षित प्रोटोकॉल और शिष्टाचार के प्रभावी अनुपालन के संबंध में दिशा निर्देश निर्गत करने को कहा था।
फोन मिस होने पर अधिकारी को करनी होगी पहल
नए निर्देश के अनुसार, अधिकारी को सांसद या विधायक का फोन आने पर उसे प्राथमिकता के साथ रिसीव करना होगा। अगर किसी जरूरी काम में व्यस्त होने के कारण कॉल नहीं उठा पाए, तो बाद में अधिकारी को खुद वापस फोन करना होगा। यानी जनप्रतिनिधि को बार-बार अधिकारी से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
MLA-MP के पत्रों पर भी समय से कार्रवाई
सरकार ने सिर्फ फोन कॉल को लेकर ही निर्देश जारी नहीं किया है। सांसद और विधायक की ओर से भेजे गए पत्रों पर भी समयबद्ध कार्रवाई करने को कहा गया है। पत्र मिलने की जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधि को देने के साथ ही उसमें उठाए गए मुद्दे पर हुई कार्रवाई और उसकी स्थिति की जानकारी भी लिखित रूप में उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।
दफ्तर आने पर प्रोटोकॉल का पालन
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विधायक या सांसद किसी काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचते हैं तो उनके पद और प्रोटोकॉल के अनुरूप सम्मान दिया जाए। पुलिस अधिकारियों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद से आम लोगों की समस्याओं के समाधान में तेजी आ सकती है। यह निर्देश 17 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उठे मुद्दों की पृष्ठभूमि में आया है।