नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 । दिल्ली के टीकरी कलां इलाके में CNG पंप पर हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सामने आ रहे आरोपों के मुताबिक, गैस लीकेज की आशंका और उससे जुड़े संकेतों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतकों और घायलों के परिजनों ने पंप प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- हादसे में जान गंवाने वाले ब्रह्माजीत के रिश्तेदार परमवीर ने बताया कि किसी तरह उन्हें जानकारी मिली थी कि हादसा हो गया है।
- जब वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि उनके परिवार का एक सदस्य मर चुका था, जबकि दूसरा बेहोशी की हालत में था। एक का तो सिर ही फट गया था।
- ब्रह्माजीत वहां 2 साल से पंप पर काम कर रहा था। भतीजे अक्षय को भी चोट लगी है, यहां पता चला कि पाइप लगते ही ब्लास्ट हो गया था।
- ब्रह्माजीत के भतीजे आदित्य ने बताया कि जब मौके पर पहुंचे तो घायल चाचा और चचेरे भाई को बहादुरगढ़ बॉर्डर पर जीवन ज्योति अस्पताल ले गए।
- वहां डॉक्टर ने ब्रह्माजीत को मृत घोषित कर दिया, जबकि अक्षय की हालत गंभीर है।
पाइप लीकेज पर नहीं दिया गया ध्यान
इसी हादसे में जान गंवाने वाले मनीष श्रीवास्तव के दोस्त आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें 15 दिन पहले मनीष ने बताया था कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्योंकि पाइप में लीकेज है, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ब्लास्ट के बाद मनीष का दायां हाथ पूरी तरह खत्म हो गया था। यदि समय पर अस्पताल ले जाते तो शायद जान बच जाती। मनीष के चाचा विजय प्रसाद ने बताया कि वह 3 साल से यहां काम कर रहा था। जब हादसा हुआ तो परिवार के लोग ही मौके पर पहुंचे और संजय गांधी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि अगर शुरुआती स्तर पर लीकेज की समस्या को गंभीरता से लिया जाता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पंप को तत्काल बंद किया जाता, तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि CNG जैसे संवेदनशील ईंधन से जुड़े प्रतिष्ठान में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
परिजनों ने पंप मैनेजर की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हादसे से पहले किसी तरह की शिकायत या लीकेज की जानकारी थी तो उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि ब्लास्ट से पहले गैस लीकेज की स्थिति कितनी देर से बनी हुई थी, सुरक्षा उपकरण काम कर रहे थे या नहीं और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण मिला था या नहीं।
हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच में पंप की सुरक्षा व्यवस्था, गैस पाइपलाइन, वाल्व, प्रेशर सिस्टम, फायर सेफ्टी उपकरण और नियमित निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
टीकरी कलां CNG पंप ब्लास्ट ने राजधानी में CNG स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे प्रतिष्ठानों पर छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए हादसे की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ अन्य CNG पंपों पर भी सुरक्षा ऑडिट और नियमित निरीक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है।
फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। हालांकि, परिजनों के आरोपों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या संभावित गैस लीकेज को समय रहते रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पंप प्रबंधन नाकाम रहा। जांच रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या मानवीय लापरवाही ने इसे गंभीर त्रासदी में बदल दिया।