मायावती का बड़ा दांव, सतीश चंद्र मिश्रा का बढ़ा कद
2027 चुनाव से पहले ब्राह्मण वोटों पर BSP की नजर
लखनऊ, 19 अगस्त 2026 । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं। अब वह लीगल और मीडिया से जुड़े कामों के साथ-साथ चुनाव आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालेंगे। मायावती ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी है।
मायावती ने कहा है कि बसपा यूपी विधानसभा चुनाव में पूरी तरह से जुट गई है। इसके लिए बसपा सभी समाज के लोगों के लिए जमीन पर मजबूती से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि बसपा की तैयारियों से विरोधी दलों में बैचेनी बढ़ी है।
मायावती ने एक्स पर दी जानकारी
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर लिखा कि यूपी में विधानसभा 2027 की तैयारियों को लेकर बीएसपी के जनाधार को सर्व समाज में बढ़ाने के लिए जमीन को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ—साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामों की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसको लेकर विरोधी पार्टियों में काफी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों में भी अब अनवरत बदलाव होना भी स्वाभाविक है।
मायावती के इस फैसले को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सतीश चंद्र मिश्रा लंबे समय से BSP के ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग से जुड़े कामों की अतिरिक्त जिम्मेदारी उन्हें देना आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में उनकी भूमिका बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
मायावती ने कहा है कि BSP 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। पार्टी संगठन को सर्वसमाज में मजबूत करने के साथ उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने खास तौर पर ब्राह्मण समाज का जिक्र करते हुए कहा कि BSP ने 2007 से ही इस समाज को विशेष महत्व दिया है।
दरअसल, 2007 में BSP ने दलित-ब्राह्मण सामाजिक समीकरण के सहारे उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। अब 2027 के चुनाव से पहले मायावती एक बार फिर सर्वसमाज की राजनीति को मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही हैं। सतीश चंद्र मिश्रा को बढ़ी हुई जिम्मेदारी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
हाल के दिनों में BSP ने ब्राह्मण समाज को लेकर कई राजनीतिक संदेश दिए हैं। मायावती ने अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित करने के बाद भी ब्राह्मण समाज को भरोसा दिलाया था कि सत्ता में आने पर 2007 की तर्ज पर ब्राह्मणों सहित सर्वसमाज को उचित सम्मान और भागीदारी दी जाएगी।
ऐसे में सतीश चंद्र मिश्रा की भूमिका बढ़ाना पार्टी के लिए सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। BSP के सामने चुनौती अपने पारंपरिक दलित आधार को मजबूत रखते हुए अन्य सामाजिक वर्गों में भी समर्थन बढ़ाने की है।
आगामी चुनाव में बीजेपी, समाजवादी पार्टी और अन्य दल भी अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में मायावती का ब्राह्मण वोटों पर दोबारा जोर देना उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।
फिलहाल सतीश चंद्र मिश्रा को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने के फैसले से साफ है कि BSP 2027 की चुनावी तैयारी को लेकर संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय हो गई है। अब देखना होगा कि सतीश चंद्र मिश्रा की नई भूमिका और ब्राह्मण समाज को लेकर मायावती की रणनीति BSP के चुनावी जनाधार को कितना विस्तार देती है।