जोशीमठ, 18 अगस्त 2026 । उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंचम केदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर में पहाड़ी से भारी मलबा आने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में मंदिर परिसर का एक हिस्सा और भंडार कक्ष आ गया। बताया जा रहा है कि मलबे में मंदिर से जुड़ी कुछ मूर्तियां भी दब गई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
सोमवार देर रात उर्गम गांव में बसे कल्पेश्वर महादेव के ऊपर की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ जिस कारण मंदिर प्रांगण में भारी मात्रा में मलबा आ गया है। फिलहाल स्थानीय लोग मिलकर मलबे को हटाने का प्रयास कर रहे हैं।
कई शिवलिंग को नुकसान
स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि देर रात तेज बारिश के कारण मंदिर के ऊपर की पहाड़ी से मलबा आ गया। मंदिर प्रांगण में रखी हनुमान और देवी देवताओं की मूर्ति सहित कई शिवलिंग मलबे में दब गए हैं। मंदिर प्रांगण में बना पुजारी निवास और मंदिर की भोग मंडी भी क्षतिग्रस्त हुई है। साथ ही मंदिर के पीछे बनी सुरक्षा दीवार को भी नुकसान हुआ है।
लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं के बीच कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में मलबा आने की घटना सामने आई। पहाड़ी से अचानक मलबा नीचे आने के कारण मंदिर परिसर में मिट्टी और पत्थरों का ढेर लग गया। भंडार कक्ष के प्रभावित होने के बाद वहां रखी सामग्री को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
कल्पेश्वर महादेव मंदिर पंचम केदारों में शामिल होने के कारण धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में मलबा आने की घटना ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र में राहत और सफाई का काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सबसे पहले मलबे को सुरक्षित तरीके से हटाकर दबे हुए सामान और मूर्तियों का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के सामने चुनौती यह भी है कि पहाड़ी से दोबारा मलबा न आए और राहत कार्य के दौरान किसी व्यक्ति की जान जोखिम में न पड़े।
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और मलबा आने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों की सुरक्षा की भी जांच जरूरी हो गई है। प्रशासन की ओर से मौसम और पहाड़ी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल मलबा हटाने और नुकसान का आकलन किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर परिसर को कितनी क्षति हुई है और दबे हुए सामान व मूर्तियों को कितना नुकसान पहुंचा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय स्तर पर आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।