तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट में सुरंग के अंदर बनी कैविटी, पानी का रिसाव बढ़ा; काम रोका गया

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चमोली, 18 अगस्त 2026 । उत्तराखंड के महत्वपूर्ण तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना में सुरंग निर्माण के दौरान एक गंभीर तकनीकी समस्या सामने आई है। सुरंग के अंदर कैविटी बनने और पानी का रिसाव होने के बाद परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य को फिलहाल रोक दिया गया है। घटना के बाद इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम स्थिति का आकलन करने में जुटी है।

यह परियोजना तपोवन-ज्योतिर्मठ क्षेत्र में धौलीगंगा नदी पर नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन द्वारा बनाई जा रही है। एनटीपीसी के पीआरओ ​राजेंद्र सिंह जायड़ा ने बताया कि 15 अगस्त को सुरंग बनाने के दौरान एक छोटा गड्ढा बन गया, जिससे हल्का पानी रिसाव होने लगा। ​जैसे ही इस बात की जानकारी मिली, प्रभावित क्षेत्र में काम तुरंत रोक दिया गया और श्रमिकों को फौरन बाहर निकाल लिया गया।

बताया जा रहा है कि सुरंग के अंदर खुदाई के दौरान अचानक एक कैविटी का पता चला। इसके बाद पानी का रिसाव शुरू होने से निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्य रोकने का निर्णय लिया गया। परियोजना प्रबंधन अब सुरंग की संरचनात्मक स्थिति और रिसाव के स्रोत का अध्ययन कर रहा है।

तपोवन-विष्णुगाड परियोजना उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है। पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां अक्सर बड़ी चुनौती बनती हैं। चट्टानों की संरचना, भूमिगत जल और अचानक सामने आने वाली कमजोर परतों के कारण निर्माण कार्य में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

सुरंग में कैविटी और पानी के रिसाव की जानकारी मिलने के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। फिलहाल प्राथमिकता सुरंग की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रिसाव की वास्तविक वजह का पता लगाना है। इसके बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

परियोजना के निर्माण से जुड़े अधिकारियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरंग में किसी भी तरह का जोखिम न रहे, इसके लिए तकनीकी जांच और आवश्यक सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। काम रुकने के कारण परियोजना की निर्माण गति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, परियोजना से जुड़े कार्यों को दोबारा शुरू करने से पहले सुरंग की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

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