जींद, 18 अगस्त 2026 । किसानों के दिल्ली कूच की कोशिश के बीच हरियाणा में खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली तक मार्च करने की तैयारी कर रहे किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। किसानों के रास्ते में लगाए गए अवरोध और सुरक्षा इंतजामों के कारण सीमा क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है।
शांतिपूर्ण ढंग से पैदल आगे बढ़ने की गुजारिश
जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि अब आधी रात बीत चुकी है। आप देख सकते हैं कि किसान सड़क के किनारे सो रहे हैं। अभी तक उनमें से बहुत कम लोग ही यहाँ पहुंचे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे संगठन, हमारे गैर-राजनीतिक समूह में हजारों किसानों को यहां लाने की क्षमता है। हालांकि हमारी योजना सीमित संख्या में लोगों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से पैदल आगे बढ़ने की है।
किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली तक मार्च करना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों की योजना आगे बढ़कर राजधानी में अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की है। वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खनौरी क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती और रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
खनौरी बॉर्डर पहले भी किसान आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में किसानों के दिल्ली मार्च की खबर के बाद प्रशासन पहले से सतर्क नजर आ रहा है। रास्ते में बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को आगे बढ़ने से रोका जा सके और किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
किसान संगठनों की ओर से सरकार के सामने विभिन्न मांगें रखी जा रही हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि उनकी मांगों पर केंद्र सरकार गंभीरता से बातचीत करे और समाधान निकाला जाए। दिल्ली की ओर मार्च को इसी दबाव की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरी ओर, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है। बड़ी संख्या में किसानों के एकत्र होने के कारण पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर रख रही हैं। खनौरी क्षेत्र में किसी भी तरह की झड़प या तनाव को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
किसानों को रोके जाने के बाद अब आगे की रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहते हैं तो प्रशासन और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में बातचीत के जरिए रास्ता निकालना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल खनौरी में किसानों को रोके जाने के बाद दिल्ली मार्च की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में किसान संगठनों की अगली घोषणा और प्रशासन की प्रतिक्रिया से तय होगा कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।