ईरान , 14 अगस्त 2026 । ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव ने वैश्विक तेल कारोबार के पुराने तौर-तरीकों को बदलना शुरू कर दिया है। पहले जहां एशियाई रिफाइनरियां बड़े पैमाने पर मध्य-पूर्व से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर थीं, वहीं अब कंपनियां अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और दूसरे क्षेत्रों से वैकल्पिक सप्लाई तलाश रही हैं। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में काफी कम हो गई है।
छह महीने पहले तक खाड़ी देशों के लिए तेल बेचना बेहद आसान था। सबसे कम लागत में तेल निकालो, होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दुनिया तक पहुंचाओ और सबसे ज्यादा कीमत देने वाले देशों को बेच दो। लेकिन ईरान के साथ जंग के बाद यह मॉडल बदल गया है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल ढुलाई लगातार प्रभावित रही। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी तथा बढ़ी बीमा लागत के कारण इस रास्ते से हर दिन गुजरने वाला कच्चा तेल 2 करोड़ बैरल से घटकर 37 लाख बैरल रह गया।
इसी वजह से सऊदी अरब, UAE और कुवैत समेत कई खाड़ी देश अब होर्मुज पर निर्भरता कम करने में जुट गए हैं। नई पाइपलाइन बिछाई जा रही हैं, पुरानी लाइनों की क्षमता बढ़ाई जा रही है और एशिया में ऑयल स्टोरेज तैयार किया जा रहा है।
UAE चाहता है, पूरा तेल होर्मुज से गुजरे बिना निर्यात हो
इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल UAE है। इस देश का कारोबार काफी हद तक व्यापार और समुद्री रास्तों पर निर्भर है। लेकिन होर्मुज संकट का सबसे ज्यादा असर भी उसी पर पड़ा। इसलिए अब वह ऐसे नए रास्ते तैयार कर रहा है, जहां से व्यापार और तेल निर्यात होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर न रहे।
इसके लिए ओमान की खाड़ी के किनारे बसे फुजैरा में दूसरी तेल पाइपलाइन का काम तेजी से चल रहा है। यह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को सीधे फुजैरा से जोड़ेगी, जिससे टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या युद्ध खत्म होने के बाद भी बदलेगा तेल बाजार?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि युद्ध और होर्मुज संकट खत्म होने के बाद क्या तेल कारोबार फिर पुराने ढर्रे पर लौटेगा। कुछ बदलाव स्थायी हो सकते हैं। एशियाई खरीदार अब सप्लाई में विविधता, वैकल्पिक शिपिंग रूट और अधिक लचीले कॉन्ट्रैक्ट को ज्यादा महत्व दे सकते हैं।
यानी ईरान युद्ध ने तेल बाजार को सिर्फ कीमतों के स्तर पर प्रभावित नहीं किया है, बल्कि तेल कहां से खरीदा जाएगा, किस रास्ते से पहुंचेगा और किस तरह का कॉन्ट्रैक्ट होगा—इन तीनों चीजों को बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी है।