पटना, 12 अगस्त 2026 । बिहार की राजनीति में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा तेज हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और जन सुराज के प्रशांत किशोर के संभावित साथ आने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। मौजूदा चर्चा को ‘माइनस BJP-RJD’ रिएलाइनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, यानी ऐसा संभावित राजनीतिक समीकरण जिसमें बीजेपी और आरजेडी दोनों से अलग एक नई धुरी खड़ी करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।
बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद बिहार में प्रशांत किशोर को लेकर एक नये समीकरण की चर्चा निकल पड़ी है। चर्चा ये है कि बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की भूमिका अब क्या होने वाली है? आने वाले समय में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी की राजनीति क्या होगी, इस पर विचार और चर्चा का माहौल गर्म है। सवाल उठता है कि क्या बिहार तीसरे मोर्चे की तरफ भी बढ़ेगा। मसलन, क्या प्रशांत किशोर गठबंधन की राजनीति भी करेंगे? ध्यान रहे कि जन सुराज की ओर से कई बार ये बयान आया है कि प्रशांत किशोर को गठबंधन की राजनीति से एतराज नहीं है।
क्या बदलेगा बिहार का सियासी समीकरण?
संभावना ये जताई जा रही है कि फिलहाल भले प्रशांत किशोर ये कहें कि वो किसी के साथ नहीं जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा तेज है कि आने वाले समय में माइनस बीजेपी और माइनस आरजेडी इन दोनों को छोड़कर किसी तीसरे दल के साथ जा सकते हैं। और इस मामले में एक नाम हर बार लिया जाता है। पीके भी उनको अपना दोस्त मानते हैं, जो नेता हैं, वो भी पीके को अपना दोस्त बताते नहीं थकते।
चिराग का रुख क्या रहा है?
चिराग पासवान पहले भी प्रशांत किशोर के साथ संभावित राजनीतिक रिश्ते को लेकर दरवाजा पूरी तरह बंद करने से बचते रहे हैं। 2025 में उन्होंने कहा था कि राजनीति में किसी संभावना को पूरी तरह नकारना उचित नहीं है, लेकिन उस समय उन्होंने वैकल्पिक गठबंधन तलाशने की तत्काल जरूरत से भी इनकार किया था।
दूसरी ओर, 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने जन सुराज के अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी और चिराग पासवान की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज किया था। इसलिए मौजूदा चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकल के स्तर पर ही देखना उचित होगा।
अगर साथ आए तो क्या बदलेगा?
यदि भविष्य में चिराग पासवान और प्रशांत किशोर किसी तरह का राजनीतिक तालमेल बनाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर बिहार के वोट समीकरण पर पड़ सकता है। चिराग का सामाजिक आधार और प्रशांत किशोर का नया राजनीतिक नैरेटिव मिलकर युवा मतदाताओं तथा पारंपरिक दलों से अलग विकल्प तलाश रहे वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है।
लेकिन गठबंधन की सफलता सीटों के बंटवारे, नेतृत्व के सवाल, संगठनात्मक ताकत और दोनों नेताओं के समर्थक वर्गों के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी। बिहार की जटिल जातीय और क्षेत्रीय राजनीति में केवल दो लोकप्रिय चेहरों का साथ आना चुनावी सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।