कालकाजी मंदिर ट्रस्ट को दान के बाद हाईकोर्ट ने रद्द की 2 FIR, उच्च न्यायालय का अनोखा फैसला

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नई दिल्ली, 08 अगस्त 2026 । दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दो FIR रद्द करने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों के बीच हुए समझौते और कालकाजी मंदिर ट्रस्ट को किए गए दान को ध्यान में रखते हुए आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं मानी। हाईकोर्ट का यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि इसमें धार्मिक ट्रस्ट को किए गए दान को मामले के निपटारे से जुड़े एक महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में देखा गया।

मध्यस्थता से सुलझा मामला

3 अगस्त को पारित आदेश में जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि जब दोनों पक्ष मध्यस्थता के जरिए अपने मतभेद सुलझा चुके हैं और अब मामले को आगे बढ़ाने में उनकी कोई रुचि नहीं है तो कार्यवाही जारी रखने का कोई मतलब नहीं है।

समझौते के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मामले में दर्ज दोनों FIR को रद्द कराने के लिए पक्षकारों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि विवादित पक्षों के बीच आपसी समझौता हो चुका है और उसके तहत कालकाजी मंदिर ट्रस्ट को दान भी दिया गया है।

अदालत ने मामले की परिस्थितियों, पक्षकारों की सहमति और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद दोनों FIR को रद्द करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले से संबंधित पक्षों को लंबी आपराधिक प्रक्रिया से राहत मिली है।

कालकाजी मंदिर ट्रस्ट को दान क्यों बना अहम आधार?

इस मामले में कालकाजी मंदिर ट्रस्ट को किया गया दान चर्चा का प्रमुख विषय रहा। समझौते की शर्तों के तहत ट्रस्ट को दान दिए जाने की बात अदालत के सामने रखी गई थी। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि केवल किसी धार्मिक संस्था को दान देना अपने आप में हर आपराधिक मामले को खत्म करने का आधार नहीं होता। अदालत मामले की प्रकृति, पक्षकारों की सहमति और कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लेती है।

हाईकोर्ट ने मौजूदा मामले में सभी परिस्थितियों को देखते हुए FIR जारी रखने को उचित नहीं माना और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।

FIR रद्द करने की हाईकोर्ट की शक्ति

उच्च न्यायालय के पास संविधान के अनुच्छेद 226 और आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित कानून के तहत उपयुक्त मामलों में FIR या आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की शक्ति होती है। खासतौर पर ऐसे मामलों में जहां पक्षकारों के बीच विवाद व्यक्तिगत या समझौता योग्य प्रकृति का हो और आगे मुकदमा चलाने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा न होता हो, अदालत परिस्थितियों के आधार पर हस्तक्षेप कर सकती है।

हालांकि गंभीर अपराधों में केवल समझौते के आधार पर FIR खत्म करना सामान्य नियम नहीं है। प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।

हाईकोर्ट के फैसले से क्या संदेश?

कालकाजी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला यह दिखाता है कि अदालतें आपसी समझौते से समाप्त हुए विवादों में परिस्थितियों के अनुरूप राहत देने पर विचार कर सकती हैं। इससे संबंधित पक्षों को आपराधिक मुकदमे की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलती है।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें समझौते के हिस्से के रूप में धार्मिक ट्रस्ट को किए गए दान का उल्लेख सामने आया। हालांकि, इस फैसले को भविष्य के सभी मामलों पर लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।

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