चंडीगढ़, 06 अगस्त 2026 । पंजाब की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने पार्टी की एक बैठक के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के सामने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। इस मांग के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है कि कांग्रेस आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री के मुकाबले मजबूत राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर विचार कर सकती है।
कुलबीर सिंह जीरा ने दी थी ये सलाह
राजा वडिंग ने आगे कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तय करेंगे कि उन्हें किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना है। लेकिन या तो मुझे कैंडिडेट न बनाएं या फिर मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ मैदान में उतारें। वड़िंग का यह बयान वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलबीर सिंह जीरा के उस सुझाव के कुछ घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को 2027 के चुनाव में अपने बड़े नेताओं को विपक्ष के प्रमुख चेहरों के खिलाफ उतारना चाहिए। जीरा ने प्रस्ताव दिया था कि राजा वडिंग को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारियों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान राजा वड़िंग ने कथित तौर पर कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व उचित समझे तो वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। इसे कांग्रेस की आक्रामक चुनावी रणनीति और सीधे मुकाबले की इच्छा के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी बड़े चेहरे को चुनाव मैदान में उतारती है तो चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो सकता है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ चुनावी अभियान को भी नई दिशा मिल सकती है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) भी अपने संगठन और सरकार के कामकाज के आधार पर चुनावी तैयारी में जुटी हुई है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों या चुनावी रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन किस रणनीति के तहत किया जाता है।
पंजाब की राजनीति में आने वाले समय में चुनावी समीकरण, गठबंधन, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाएंगे। राजनीतिक दल अभी से संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क बढ़ाने और मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के प्रयास तेज कर रहे हैं।