नई दिल्ली, 04 अगस्त 2026 । दिल्ली में लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट्स के मामलों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने स्थानीय निकायों और संबंधित सरकारी एजेंसियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी पर नियंत्रण के लिए केवल शिकायतों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय हर वार्ड में नियमित और व्यवस्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) यानी नसबंदी कार्यक्रम तथा एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन (ARV) अभियान चलाया जाना चाहिए।
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा कि डॉग बाइट की घटनाएं अब कड़वी सच्चाई बन चुकी हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी मां को दो बार कुत्ते काट चुके हैं। उन्होंने कहा, हर दिन लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। भगवान करे किसी को न काटें, लेकिन यह सभी के लिए खतरा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि समाधान ऐसा होना चाहिए, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बना रहे।
कोर्ट ने कहा- कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाए
कोर्ट ने कहा कि हर वार्ड में विशेष कैंप लगाकर कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल इलाज, नसबंदी और वैक्सीनेशन के लिए पकड़ा जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल एक्सपर्ट गौरी मौलेखी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। एमसीडी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।