नई दिल्ली, 04 अगस्त 2026 । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को आधुनिक, सुव्यवस्थित और वैश्विक स्तर का शहर बनाने की दिशा में मॉनिटरिंग कमिटी ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कमिटी का मानना है कि लगभग एक दशक पुराने भवन निर्माण नियम (Building Bye-Laws) मौजूदा शहरी जरूरतों और तेजी से बदलते विकास मॉडल के अनुरूप नहीं रह गए हैं। इसलिए दिल्ली के समग्र विकास, बेहतर शहरी नियोजन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन नियमों में व्यापक संशोधन किए जाने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा है कि मालवीय नगर में जिस इमारत में आग लगी थी, उसका निर्माण अवैध रूप से किया गया था। इमारत में पर्याप्त निकासी व्यवस्था नहीं थी। इससे 22 लोगों की मौत हुई, जिनमें 15 विदेशी शामिल थे। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को या तो रोका जाए या सीमित किया जाए। ऐसा न होने से ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही है।
- मॉनिटरिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा
- राजधानी को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने के लिए बेहतर मास्टर प्लान को बताया जरूरी
क्या कहा गया रिपोर्ट में
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली में सभी तरह की इमारतों का निर्माण साल 2016 के यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से किया जाता है लेकिन अब इन नियमों को अपडेट करने की जरूरत है। कमिटी ने रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली को ग्लोबल सिटी बनाने के मकसद से मास्टर प्लान-2021 तैयार किया गया था। इसके तहत कुछ रिहायशी इलाकों में सीमित कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत दी गई थी लेकिन प्रभावी कंट्रोल न होने से यह व्यवस्था अब समस्या बन गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकल शॉपिंग सेंटर वाले कई रिहायशी इलाकों की ऊपरी मंजिलें मूल रूप से रिहायशी उपयोग के लिए थीं लेकिन अब वहां भी कमर्शियल काम हो रहे है।
कमिटी ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि मौजूदा बिल्डिंग नियमों की वजह से कई विकास परियोजनाएं अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिल अनुमतियों में फंस जाती हैं। यदि नियमों को समयानुकूल बनाया जाए तो आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग (Mixed Use) परियोजनाओं को गति मिलेगी। इससे न केवल निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
सुझावों में आधुनिक तकनीक आधारित निर्माण, हरित भवन (Green Buildings), ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पार्किंग प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा मानकों और डिजिटल बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके अलावा पुराने भवनों के पुनर्विकास (Redevelopment) और शहरी पुनर्निर्माण (Urban Renewal) को आसान बनाने के लिए नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की सिफारिश की गई है।
मॉनिटरिंग कमिटी का मानना है कि यदि दिल्ली को वास्तव में वर्ल्ड क्लास सिटी बनाना है तो केवल नई परियोजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियामकीय ढांचे में भी सुधार करना होगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, परियोजनाओं की मंजूरी तेज होगी और राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्डिंग नियमों में प्रस्तावित बदलावों से दिल्ली में योजनाबद्ध शहरी विकास को गति मिलेगी, निर्माण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और नागरिकों को सुरक्षित, आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल भवनों का लाभ मिलेगा। आने वाले समय में सरकार इन सुझावों पर विचार कर नए नियम लागू करती है तो राजधानी के शहरी विकास में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।