हरियाणा में शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन का तोहफा

13 अगस्त तक प्रस्ताव भेजने के निर्देश, पदोन्नति प्रक्रिया में आएगी तेजी

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चंडीगढ़ , 30  जुलाई 2026 । हरियाणा सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी देते हुए पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि पात्र शिक्षकों के प्रमोशन संबंधी प्रस्ताव 13 अगस्त तक अनिवार्य रूप से भेजे जाएं। सरकार का उद्देश्य लंबे समय से लंबित पदोन्नति मामलों का समयबद्ध निस्तारण कर योग्य शिक्षकों को उनके अधिकार के अनुसार उच्च पदों पर नियुक्त करना है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, हाल ही में विभिन्न विषयों में जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों को टीजीटी पदों पर पदोन्नति दी गई थी, लेकिन कई पात्र शिक्षकों के मामले निर्धारित समय के बाद प्राप्त हुए। ऐसे शिक्षकों को अब अंतिम अवसर दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर पदोन्नति का दावा प्रस्तुत कर सकें। निदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र शिक्षकों के प्रमोशन केस 13 अगस्त 2026 तक हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी, दोनों माध्यमों से भेजे जाएं। प्रस्तावों के साथ शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अद्यतन एसीआर, विशेष एसीआर, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा समरी शीट संलग्न करना अनिवार्य होगा।

शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित कार्यालयों को पात्र शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता सूची, गोपनीय रिपोर्ट (ACR/APAR) तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्ताव भेजने होंगे। इसके बाद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पूरी कर योग्य शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि समय पर पदोन्नति मिलने से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों को इस निर्णय से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में और पूरी पारदर्शिता के साथ भेजे जाएं ताकि किसी प्रकार की देरी या त्रुटि न हो।

हरियाणा सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रशासनिक सुधारों पर काम कर रही है। पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने का यह निर्णय न केवल शिक्षकों के करियर विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों में नेतृत्व और शैक्षणिक प्रबंधन भी बेहतर होने की संभावना है।

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