वॉशिंगटन / तेहरान/ तेल अवीव, 30 जुलाई 2026 । अमेरिका ने ईरान के 10 से अधिक शहरों और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार, कार्रवाई का मुख्य निशाना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड सेंटर, ड्रोन सुविधाएं और अन्य सैन्य ठिकाने थे। यह सैन्य अभियान ईरान द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी बलों पर किए गए मिसाइल हमले के जवाब में चलाया गया।
केश्म द्वीप पर रिहायशी इमारत पर हमले में एक दंपती और उनके 2 साल के बच्चे की मौत हुई, जबकि दो अन्य बच्चे घायल हुए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन सुविधाएं, तटीय निगरानी एवं रक्षा ठिकाने और समुद्री सैन्य क्षमताएं शामिल हैं।
ट्रम्प ने हमलों से पहले कहा था कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमला करने की कोशिश की, अब हमारी बारी है।”
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों, समुद्री मार्गों और सहयोगी देशों के लिए उत्पन्न खतरों को कम करना था। रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी ईरान के कई शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र में दागी गई कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है, जबकि क्षेत्र के अन्य देशों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील कर रहा है।