16 करोड़ का नया पुल 17 दिन में धंसा, टौंस नदी पर बने पुल की गुणवत्ता पर उठे सवाल

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देहरादून , 28  जुलाई 2026 । उत्तराखंड में देहरादून-पांवटा साहिब के पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर टौंस नदी पर बने करीब 16 करोड़ रुपये लागत वाले नए पुल में उद्घाटन के महज 17 दिन बाद ही भारी धंसाव सामने आने से निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल के एप्रोच रोड और एक हिस्से में आई दरारों तथा धंसाव के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर यातायात पर निगरानी बढ़ा दी है और तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची प्रेमनगर पुलिस एवं प्रशासनिक टीम ने बताया कि पुलिया का मूल ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने तकनीकी इंजीनियरों की टीम के साथ स्वयं इसका निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने 03 घंटे में सड़क को सुचारू करने के निर्देश दिए है।

मार्च 2026 में पुल के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया

इसी महीने 11 जुलाई की रात टौंस नदी के उफान ने ह्यूम पाइप के सहारे बनाई गई अस्थाई पुलिया को बहा दिया था, जिससे इलाके का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने बचा काम निपटाकर 12 जुलाई से ही नवनिर्मित मुख्य पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी थी। लेकिन 17 दिनों में ही पुल में धंसाव आ गया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुल हाल ही में जनता के लिए खोला गया था, लेकिन लगातार बारिश और एप्रोच रोड के धंसने की घटना के बाद इसकी मजबूती को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बने पुल में इतने कम समय में आई खराबी निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है। घटना के बाद संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

लोक निर्माण विभाग और तकनीकी विशेषज्ञ अब यह जांच करेंगे कि धंसाव का कारण अत्यधिक वर्षा, नदी के जलस्तर में बदलाव, मिट्टी का कटाव (स्कॉरिंग), डिजाइन संबंधी कमी या निर्माण में तकनीकी खामी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता, निर्माण मानकों और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण, समय-समय पर निरीक्षण और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुल में धंसाव की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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