जालंधर , 28 जुलाई 2026 । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब में अपने जनसंपर्क अभियान को तेज करते हुए ‘समरसता यात्रा’ के माध्यम से दलित समुदाय तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। पार्टी की योजना के अनुसार यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर पंजाब की प्रत्येक विधानसभा सीट तक पहुंचेगी। अभियान का उद्देश्य सामाजिक समरसता का संदेश देना, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना तथा विभिन्न वर्गों के साथ संवाद को मजबूत करना बताया जा रहा है।
जालंधर से वाराणसी तक निकलेगी समरसता यात्रा
बीजेपी ने संत रविदास को मानने वाले दलित समुदाय तक पहुंचने के लिए सात महीने लंबा कैंपेन तैयार किया है। पार्टी का फोकस यूपी और पंजाब के दलित वोटर हैं। संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से शुरू होने वाले अभियान का पहला चरण 30 जुलाई से 10 सितंबर के बीच पूरा होगा। इस दौरान पार्टी के नेता रविदास जन्मस्थली की मिट्टी कलशों में लेकर विभिन्न मंदिरों और मठों में जाएंगे। साधु-संतों और महंतों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की जाएगी। दूसरे चरण में 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली समरसता यात्रा खास होगी, जिसके तहत पंजाब से यूपी के बीच दलित बाहुल्य इलाकों को साधा जाएगा। 5 नवंबर को वाराणसी पहुंचने से पहले यात्रा गांवों और कस्बों में रुकेगी।
भाजपा नेताओं के अनुसार, समरसता यात्रा के दौरान पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी दलित बस्तियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों से संवाद करेंगे। इसके साथ ही सामाजिक न्याय, विकास, शिक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर लगातार संपर्क अभियान से संगठन को भी मजबूती मिलेगी।
पंजाब की राजनीति में दलित मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और राज्य की कई विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। इसी कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा की यह यात्रा भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें सामाजिक संपर्क के साथ-साथ संगठनात्मक विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी चुनावी अभियान की सफलता का आकलन केवल घोषणा या यात्रा से नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव के समय मतदाताओं की प्रतिक्रिया, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और अन्य राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा। ऐसे में समरसता यात्रा का असर आगामी चुनावी माहौल में कितना दिखाई देगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।