नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026 । जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर अब केवल मौसम और पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की नींद और स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। एक हालिया शोध में दावा किया गया है कि बढ़ते तापमान और गर्म रातों के कारण दिल्ली के लोग औसतन हर साल करीब 66 घंटे की नींद गंवा रहे हैं। शोध के अनुसार, रात के समय बढ़ता तापमान लोगों की गहरी और आरामदायक नींद में बाधा डाल रहा है।
क्लाइमेट सेंट्रल की बुधवार को आई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके मुताबिक, जलवायु से नींद प्रभावित होने वाले दुनिया के प्रमुख हॉटस्पॉट में भारत भी शामिल है। दक्षिण भारत के शहरों में इस वजह से सालाना 78 से 91 घंटे तक नींद कम हो रही है। इनमें 8 से 9 घंटे का नुकसान सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है।