वॉशिंगटन, 15 जुलाई 2026 । अमेरिका की ओर से भारत पर 100% टैरिफ लगाए जाने की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में चर्चा तेज हो गई है। यदि ऐसा फैसला लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया जा रहा है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके।
इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया।
अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे आयात शुल्क लागू होने की स्थिति में भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर ऑटो कंपोनेंट्स, स्टील, एल्युमीनियम, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी तरह का अतिरिक्त टैरिफ दोनों देशों के व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन पर प्रभाव डाल सकता है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संभावित विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक स्तर पर निकाला जा सकता है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से आधिकारिक रुख और संभावित व्यापारिक वार्ताओं पर नजर बनी हुई है। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित टैरिफ लागू होगा या दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचेंगे।