हरियाणा , 15 जुलाई 2026 । ‘एसीबी के सहयोगी’ के रूप में चर्चित रविंद्र जंगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपों की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है।
थाना चीका पुलिस ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर दो नामों से पासपोर्ट बनवाने के आरोप में हुड्डा रिहायशी कॉलोनी-1, चीका निवासी रविंद्र अरोड़ा उर्फ जंगी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार जांच के दौरान वसीयतनामा, जमाबंदी, मतदाता सूची, राशन कार्ड तथा अन्य सरकारी अभिलेखों का मिलान किया गया। जांच में सिंगारा सिंह के परिवार के रिकॉर्ड में सिंगारा सिंह, स्वर्ण कौर, राजविंद्र सिंह, विरेंद्र सिंह एवं गुरविंद्र सिंह के नाम दर्ज पाए गए, जबकि रविंद्र नाम का कोई सदस्य रिकॉर्ड में नहीं मिला।
जांच में यह भी पाया गया कि गुरविंद्र सिंह के नाम से जारी पासपोर्ट संख्या A8752861 के संबंध में डी.ए.वी कॉलेज, चीका से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार उस नाम का कोई विद्यार्थी कभी नामांकित नहीं रहा। पुलिस का आरोप है कि रविंद्र अरोड़ा उर्फ जंगी ने गुरविंद्र सिंह के नाम से कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, चंडीगढ़ से पासपोर्ट जारी करवाया।
इन तथ्यों के आधार पर थाना चीका में एफ.आई.आर नंबर 172, दिनांक 10 जुलाई 2026 दर्ज की गई। आरोपी रविन्द्र अरोड़ा उर्फ जंगी के विरुद्ध पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12(1)(बी), 12(1)(सी), 12(1)(डी) तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419, 420, 467, 468 एवं 471 के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच सभी कानूनी प्रावधानों के तहत की जाएगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एफआईआर किन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर दर्ज की गई और आगे क्या कार्रवाई होगी।