‘सतलुज’ विवाद के बीच जसवंत सिंह खालड़ा का मामला फिर चर्चा में

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चंडीगढ़, 14  जुलाई 2026 । दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म निर्माताओं से सवाल करते हुए कहा कि उस दौर की पूरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्म में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जब जसवंत सिंह खालड़ा सितंबर 1995 में लापता हुए, तब पंजाब के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री कौन थे।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 1995 में जब जसवंत सिंह खालड़ा का कथित अपहरण हुआ और बाद में उनकी हत्या का मामला सामने आया, उस समय पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह थे। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव थे। बेअंत सिंह की हत्या अगस्त 1995 में हो चुकी थी और इसके बाद हरचरण सिंह बराड़ ने पंजाब के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। खालड़ा के लापता होने की घटना हरचरण सिंह बराड़ के मुख्यमंत्री रहते हुई, जबकि केंद्र में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार थी।

रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म में दिखाए गए 25,000 लोगों के लापता होने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस विषय पर तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। दूसरी ओर, जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने उस दौर में लापता हुए लोगों की संख्या और घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए जन आयोग गठित करने की मांग की है।

फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। एक पक्ष इसे मानवाधिकारों से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को सामने लाने का प्रयास बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष फिल्म में किए गए कुछ दावों और तथ्यों की प्रस्तुति पर सवाल उठा रहा है। इस कारण फिल्म को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज बनी हुई है।

पूरी सच्चाई का पता लगाने की मांग

दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि वह इस मांग का सौ प्रतिशत समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि विवादित दावों की जांच एक कानूनी और समय-सीमा वाली प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए और जोर दिया कि पंजाब का भविष्य शांति और मेल-मिलाप में ही है। कुलदीप सिंह गर्गज्ज मंगलवार को सतलुज नदी के किनारे अरदास करने वाले हैं, ताकि पंजाब में बरसों से चली आ रही हिंसा से प्रभावित सभी लोगों के लिए प्रार्थना की जा सके। मारे गए मानवाधिकार कार्यकर्ता की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने जत्थेदार से एक जन आयोग बनाने का आग्रह किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कितने लोग लापता हुए थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर परमजीत ने कहा है कि जब पंजाब हरिके पट्टन में अरदास के लिए इकट्ठा होने की तैयारी कर रहा है। जहां अज्ञात शव मिले थे, तो पूरे सिख समुदाय को सच्चाई का पता लगाने के लिए एकजुट प्रयास करना चाहिए।

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