यूपी में बिजली मीटर का ‘लोड’ क्यों बढ़ाया जा रहा है? UPPCL ने दी सफाई, जानिए पूरा मामला

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लखनऊ, 06 जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का लोड (विद्युत भार) बढ़ा दिया गया है। इससे करीब 25 फीसदी गरीब उपभोक्ताओं की बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी की सुविधा छिन गई है। लाखों बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत बिजली लोड (Sanctioned Load) में बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया किसी मनमाने फैसले के तहत नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता (Electricity Supply Code) के प्रावधानों के अनुसार की जा रही है।

तीन अधिकतम मांग के आधार पर लोड का पुनर्निर्धारण

पावर कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर (कॉमर्शियल) प्रशांत वर्मा का कहना है कि, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की बिजली आपूर्ति संहिता-2005 और टैरिफ आदेश वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रावधानों के मुताबिक ही लोड में वृद्धि की गई है। एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच हुई मीटर की बिलिंग के दौरान जिन उपभोक्ताओं ने तीन बार मंजूर लोड का उल्लंघन किया है, उनके द्वारा प्रयोग की गई तीन अधिकतम मांग के आधार पर लोड का पुनर्निर्धारण किया गया है।

UPPCL के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं की वास्तविक अधिकतम बिजली खपत (Maximum Demand) लगातार तीन महीने तक उनके स्वीकृत लोड से अधिक पाई गई, केवल उन्हीं का लोड संशोधित किया गया है। निगम का कहना है कि नया स्वीकृत लोड तीन महीनों में दर्ज न्यूनतम अधिकतम मांग के आधार पर तय किया गया है, ताकि उपभोक्ता के वास्तविक उपयोग के अनुरूप कनेक्शन हो।

निगम के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत लगभग 46.68 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड संशोधित किया गया है, जिनमें करीब 20 लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ता भी शामिल हैं। UPPCL का कहना है कि यह कदम बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक सटीक और नियमानुसार संचालित करने के लिए उठाया गया है।

हालांकि, उपभोक्ता संगठनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का लोड बिना पूर्व सूचना बढ़ाया गया, जिससे भविष्य में फिक्स्ड चार्ज और अन्य शुल्क बढ़ने की आशंका है। इस पर UPPCL का कहना है कि पूरी प्रक्रिया आपूर्ति संहिता के अनुरूप की गई है और इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।

UPPCL ने यह भी स्पष्ट किया कि बीपीएल (BPL) श्रेणी के जिन उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड 1 किलोवाट से अधिक हो जाएगा, उनकी श्रेणी नियमों के अनुसार बदल सकती है, क्योंकि बीपीएल लाभ निर्धारित सीमा तक ही उपलब्ध है।

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