दिल्ली के नए जिलों को मिली प्रशासनिक मजबूती,

LG ने बढ़ाए अधिकारियों के अधिकार; शासन व्यवस्था होगी और प्रभावी

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नई दिल्ली, 29 जून्‌ 2026 । दिल्ली में नवगठित जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने के लिए उपराज्यपाल (LG) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत नए जिलों में तैनात अधिकारियों को पहले की तुलना में अधिक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने पुनर्गठित राजस्व जिलों में तैनात डिप्टी कमिश्नर (डीएम), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), रेवेन्यू असिस्टेंट, तहसीलदार और कंसोलिडेशन ऑफिसरों को उनके नए अधिकार क्षेत्रों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की शक्तियां देने को मंजूरी दे दी है।

  • यह फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में हाल ही में किए गए राजस्व जिलों के पुनर्गठन के बाद लिया गया है।
  • इसके तहत संबंधित अधिकारियों को उनके पुनर्गठित अधिकार क्षेत्रों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी जाएंगी।
  • इसका मकसद नए जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखना, प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रखना और लोगों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने में बाधा नहीं आने देना है।
  • ये नियुक्तियां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 14 के तहत की जा रही हैं।
  • यह नया कानून पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह लागू हुआ है।
  • धारा 14 के तहत राज्य सरकार को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करने और जिला मजिस्ट्रेट व अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नामित करने जैसे अधिकार हैं।
  • दिल्ली में ये अधिकार गृह मंत्रालय की 28 जून 2024 की अधिसूचना के आधार पर उपराज्यपाल को प्राप्त हैं।
  • इस अधिसूचना के तहत BNSS की धारा 523 को छोड़कर राज्य सरकार की सभी शक्तियां और जिम्मेदारियां उपराज्यपाल को सौंपी गई हैं।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद जिला स्तर के अधिकारी कई प्रशासनिक मामलों में शीघ्र निर्णय ले सकेंगे। इससे छोटी-छोटी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए उच्च स्तर की मंजूरी पर निर्भरता कम होगी और आम जनता से जुड़े कार्यों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी।

अधिकारों के विस्तार का उद्देश्य नए जिलों में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप त्वरित फैसले सुनिश्चित करना है। इससे कानून-व्यवस्था, राजस्व, आपदा प्रबंधन और जनसेवाओं से जुड़े मामलों में अधिकारियों की भूमिका पहले से अधिक प्रभावी होगी।

प्रशासन का कहना है कि इस निर्णय से नए जिलों में शासन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराई जा सकेंगी। आने वाले समय में इस व्यवस्था का प्रभाव दिल्ली के प्रशासनिक कामकाज और सेवा वितरण प्रणाली में भी देखने को मिल सकता है।

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