बिहार , 24 जून् 2026 । बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रतीकों को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार में मंत्री लखेंद्र पासवान ने अपने सरकारी आवास से लालटेन हटवाने के बाद बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “अब बिहार में लालटेन की कोई जरूरत नहीं रह गई है,” जिसके बाद उनके इस कदम को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके चुनाव चिह्न पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
इस संबंध में मंत्री लखेंद्र पासवान ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि लालटेन कहां से कूड़े के ढेर में पहुंचा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि वो तो पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव के पुराने आवास में रहने पहुंचे हैं। सरकार की ओर से ये आवास उन्हें मुहैय्या कराया गया है। इससे पहले तेजप्रताप यादव ने भी कब ही लालटेन को छोड़ने का फैसला लिया है।
मंत्री पासवान ने कहा कि बिहार अब विकास, आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के दौर में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार हुआ है, इसलिए लालटेन जैसे पुराने प्रतीक अब केवल राजनीतिक पहचान तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता भी अब विकास और सुशासन के मुद्दों पर राजनीति चाहती है।
लालटेन राष्ट्रीय जनता दल का चुनाव चिह्न है और लंबे समय से बिहार की राजनीति में एक प्रमुख राजनीतिक प्रतीक माना जाता रहा है। ऐसे में मंत्री द्वारा इसे अपने आवास से हटवाने और उसके बाद दिए गए बयान को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को आगामी चुनावी रणनीति और विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्षी दलों की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चुनावी माहौल के बीच ऐसे प्रतीकात्मक कदमों से राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। एक ओर सत्तारूढ़ गठबंधन विकास के मुद्दे को प्रमुखता दे रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक विरासत और जनाधार से जोड़कर देख सकता है।
मंत्री लखेंद्र पासवान का यह बयान अब बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रह सकता है।