तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 18 जून् 2026 । करीब चार महीने से जारी अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों ने निर्धारित आधिकारिक कार्यक्रम से एक दिन पहले ही एक समझौते पर सहमति जताते हुए संघर्ष समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के तहत सैन्य गतिविधियों को रोकने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और आगे की वार्ताओं का रास्ता खोलने पर सहमति बनी है।
ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी।
इस समझौते पर 19 जून को स्विटजरलैंड में जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इस पर दस्तखत कर दिए गए।
बताया जा रहा है कि यह समझौता मूल रूप से स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होना था, लेकिन दोनों पक्षों ने तय कार्यक्रम से पहले ही समझौते को अंतिम रूप दे दिया। समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लंबित विवादों को कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाने का प्रावधान शामिल है।
इस समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला। युद्ध समाप्ति और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद से तेल कीमतों में नरमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों ने भी इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता अंतिम समाधान नहीं है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी विस्तृत वार्ता बाकी है। समझौते के तहत आगामी 60 दिनों में व्यापक और स्थायी व्यवस्था पर बातचीत की जाएगी।
कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देश समझौते की शर्तों का कितना पालन करते हैं और आगे की वार्ताएं किस दिशा में बढ़ती हैं।