चंद्रशेखर से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य, दो दिन पहले ही ओवैसी ने दे दिए थे संकेत! यूपी में बनेगा तीसरा मोर्चा?

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लखनऊ, 17 जून्‌ 2026 । उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद की हालिया मुलाकात ने नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ दिन पहले ही असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी राजनीति में नए विकल्प और व्यापक सामाजिक गठबंधन की जरूरत को लेकर संकेत दिए थे, जिसके बाद यह बैठक और अधिक चर्चा का विषय बन गई है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी (AJP) के संस्थापक स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूपी के नगीना लोक सभा क्षेत्र के सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की। यूपी में करीब 8 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस मुलाकात से नए सियासी गठबंधन के कयास लगाए जाने लगे हैं।

राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को आगामी विधानसभा चुनावों और राज्य की बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को उठाते रहे हैं, जबकि चंद्रशेखर आजाद दलित और वंचित समाज की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना कई तरह की संभावनाओं को जन्म दे रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि विभिन्न क्षेत्रीय और सामाजिक आधार वाले दल एक साझा मंच पर आते हैं, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण बन सकता है। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन या तीसरे मोर्चे की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही राजनीतिक मुलाकातों ने अटकलों को जरूर हवा दी है।

इस बीच, ओवैसी के हालिया बयान भी चर्चा में हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विपक्षी राजनीति में नई रणनीति और नए सामाजिक गठजोड़ की कोशिशें आगामी चुनावों से पहले और तेज हो सकती हैं। हालांकि किसी भी संभावित मोर्चे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न दल और नेता साझा एजेंडे तथा सीटों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर कितनी सहमति बना पाते हैं।

फिलहाल, स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे को लेकर बहस को नई ऊर्जा दे दी है। आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि यह मुलाकात केवल राजनीतिक शिष्टाचार थी या किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन की शुरुआत।

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