तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, 12 जून् 2026 । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि “आज ईरान के साथ जंग खत्म हो गई।” ट्रम्प के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य हमलों, जवाबी कार्रवाई और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी।
ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि शांति समझौते पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है।
इससे पहले ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा था कि सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने नई डील को मंजूरी कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर इसी सप्ताह यूरोप में साइन हो सकता है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इसमें शामिल होंगे।
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियों और कड़े बयानों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि ट्रम्प ने संघर्ष समाप्त होने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह सामान्य हुए हैं या नहीं, इस पर अभी नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि किसी भी संघर्ष के समाप्त होने की वास्तविक पुष्टि केवल राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों, कूटनीतिक संवाद और आधिकारिक समझौतों से होती है। इसलिए ट्रम्प के बयान के बाद अब दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान की आगामी रणनीति पर टिकी हैं।
यदि दोनों देशों के बीच तनाव वास्तव में कम होता है, तो इसका सकारात्मक असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। हाल के संघर्षों के कारण तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई थी। ऐसे में किसी भी प्रकार की शांति पहल को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव होगी जब दोनों देश आपसी विवादों को कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ें। फिलहाल ट्रम्प के बयान ने युद्ध और शांति को लेकर नई बहस शुरू कर दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।