नई दिल्ली, 12 जून् 2026 । राजधानी दिल्ली में कोचिंग सेंटर्स की बढ़ती मनमानी, भारी फीस, भ्रामक विज्ञापनों और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इसी दिशा में कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने और उनकी जवाबदेही तय करने के लिए एक नए कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना तथा कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करना है।
दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार कोचिंग संस्थानों के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और स्टूडेंट्स सुरक्षित हों, इसके लिए गाइडलाइंस तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स दिल्ली में कोचिंग के लिए आते है, इसलिए दिल्ली इस क्षेत्र में व्यापक नियम-कानून लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने जा रहा है।
क्यों जरूरी है नियम ?
2024 में ओल्ड राजेद्र नगर में एक कोचिंग सेटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुई तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद तमाम कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा के लिए आसपास ड्रेनेज सिस्टम, तारों के जंजाल, कोचिंग सेंटर्स की मनमानी की ओर भी ध्यान दिलाया गया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर.सी. गौबा की अध्यक्षता में हाई लेवल कमिटी कमियों की पहचान की और कड़े रेगुलेशंस और निगरानी का सुझाव दिया था। दिल्ली मे करीब 600 कोचिंग सेंटर्स है, जो रजिस्टर्ड है और कर्मशल तौर पर चलते है। बाकी कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर्स की संख्या काफी ज्यादा है।
प्रस्तावित कानून के तहत कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, फीस संरचना, विज्ञापन मानकों, बुनियादी सुविधाओं और छात्र शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए जा सकते हैं। साथ ही छात्रों को गुमराह करने वाले प्रचार, फर्जी सफलता दर दिखाने और अनुचित शुल्क वसूली पर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए जाने की संभावना है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कानून छात्रों के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे कोचिंग संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को भी यह जानकारी मिल सकेगी कि वे जिस संस्थान में अपने बच्चों का दाखिला करा रहे हैं, वह निर्धारित मानकों का पालन करता है या नहीं।
सरकार का उद्देश्य कोचिंग क्षेत्र को बंद करना नहीं, बल्कि उसे अधिक जिम्मेदार और छात्र-केंद्रित बनाना है। यदि नया कानून लागू होता है, तो दिल्ली उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हो सकती है जहां कोचिंग उद्योग के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा मौजूद है। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और अधिक सुरक्षित सीखने का माहौल मिलने की उम्मीद है।