नई दिल्ली , 11 जून् 2026 । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी संकट के बीच बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों का एक समूह अलग गुट बनाने की तैयारी में है और इस सूची में वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा तथा पूर्व क्रिकेटर एवं सांसद यूसुफ पठान का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लगातार टूट जारी है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, काकोली घोष के नेतृत्व वाले TMC बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों के नाम की लिस्ट जारी कर दी।
इसमें ममता की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सांसद सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का भी नाम शामिल है। 8 जून को काकोली घोष ने दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसाभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर ओम बिरला को भेजा है।
इसके बाद TMC के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 2 सांसद यानी कुल 22 सांसद टूट चुके हैं। वहीं 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बागी सांसदों के समूह ने लोकसभा में अलग पहचान की मांग को लेकर आवश्यक समर्थन जुटाने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि यह संख्या पार्टी के लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई के करीब पहुंचती है, जो दल-बदल कानून के तहत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम की अगुवाई कथित तौर पर सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ कई प्रभावशाली सांसद जुड़े हुए हैं और वे संसद में अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता चाहते हैं।
हालांकि, टीएमसी नेतृत्व की ओर से इन दावों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने हाल के दिनों में पार्टी सांसदों और नेताओं से लगातार संवाद कर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे चर्चित चेहरे वास्तव में बागी खेमे के साथ जाते हैं, तो इसका असर केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति और संसद के शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी तक दोनों नेताओं की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित सांसदों के आधिकारिक रुख से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।