H-1B वीजा पर बड़ी राहत: 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने का आदेश अदालत ने किया रद्द

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वॉशिंगटन , 09 जून्‌ 2026 । अमेरिका में H-1B वीजा धारकों और विदेशी पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एक अमेरिकी संघीय अदालत ने H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (लगभग 85-90 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह शुल्क पूर्व में जारी एक राष्ट्रपतिीय आदेश के तहत लागू किया गया था, जिससे कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

ट्रम्प ने सितंबर 2025 में घोषणा की थी कि जो कंपनियां H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देंगी, उन्हें हर वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की एक्स्ट्रा फीस देनी होगी। इसके बाद 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसे चुनौती दी थी। अब कोर्ट के फैसले के खिलाफ ट्रम्प सरकार अपील कर सकती है।

मैसाचुसेट्स के बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि इतना बड़ा शुल्क वास्तव में एक “कर (Tax)” की तरह है और अमेरिकी संविधान के अनुसार नया कर लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति प्रशासन के पास इस प्रकार का शुल्क लगाने की कानूनी शक्ति नहीं थी।

यह शुल्क 2025 में लागू किया गया था और इसका उद्देश्य नए H-1B वीजा आवेदनों को महंगा बनाना था। तकनीकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों ने इसका विरोध किया था, क्योंकि वे बड़ी संख्या में विदेशी कुशल पेशेवरों पर निर्भर हैं। आलोचकों का तर्क था कि इससे अमेरिका में प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती प्रभावित होती और नवाचार पर भी असर पड़ सकता था।

अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) इस शुल्क को लागू नहीं कर सकेंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि प्रशासन इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दे सकता है।

H-1B एक गैर-अप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। पहले H-1B वीजा आवेदन करने पर कंपनियों को करीब 2000 से 5000 डॉलर तक फीस देनी पड़ती थी।

ट्रम्प सरकार बोली- H-1B का दुरुपयोग हो रहा

ट्रम्प सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि H-1B सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है। सरकार के मुताबिक कई कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही थीं। ऐसे में यह फीस टैक्स नहीं बल्कि एक तरह का आर्थिक दंड है।

सरकार ने कहा कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति को विदेशी नागरिकों की एंट्री सीमित करने का अधिकार है, लेकिन कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ।

इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले को भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

भारतीय पेशेवरों के लिए यह फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क रद्द होने से अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती अपेक्षाकृत आसान बनी रहेगी और भारतीय आईटी पेशेवरों को भी राहत मिलेगी।

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