आश्रम की जमीन पर बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 26 हजार फ्लैट, अब ईडी की जांच के दायरे में आए अधिकारी

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नोएडा , 08 जून्‌ 2026 । उत्तर प्रदेश के शो-विंडो कहे जाने वाले नोएडा में आश्रम की जमीन पर कथित तौर पर बिना स्वीकृत नक्शे और नियमों का पालन किए हजारों फ्लैटों के निर्माण के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में वित्तीय अनियमितताओं, अवैध निर्माण और सरकारी नियमों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं की जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि करीब 26 हजार फ्लैट ऐसे प्रोजेक्ट्स में बनाए गए, जिनकी वैधानिक मंजूरी और नक्शा स्वीकृति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ईडी की रडार पर आधा दर्जन पीसीएस अधिकारी

जांच की शुरुआत में ईडी ने निबंधन विभाग के दो सब-रजिस्ट्रार से लंबी पूछताछ की है। इसके बाद अब उन अधिकारियों की बारी है जो निर्माण के समय अहम पदों पर तैनात थे। ईडी की रडार पर करीब आधा दर्जन पीसीएस अधिकारियों सहित प्राधिकरण के लगभग एक दर्जन अधिकारी है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने रिश्वत के बदले मानचित्र स्वीकृत किए बिना ही इतने बड़े पैमाने पर निर्माण की अनुमति दी। ईडी अब इन अधिकारियों, उनके नाते-रिश्तेदारों और करीबियों की आर्थिक कुंडली खंगाल रही है, क्योंकि आशंका है कि भ्रष्टाचार से कमाई गई काली रकम को इन्हीं के जरिए खपाया गया है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निर्माण कार्य के दौरान किन अधिकारियों ने अनुमति दी, किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और क्या इसके पीछे किसी बड़े आर्थिक लाभ या भ्रष्टाचार का नेटवर्क सक्रिय था। ईडी वित्तीय लेन-देन, जमीन के स्वामित्व, बिल्डर कंपनियों और संबंधित विभागों के बीच हुए समझौतों की भी जांच कर रही है। कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कैसे संभव हुआ।

मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि हजारों परिवार इन फ्लैटों में रह रहे हैं या निवेश कर चुके हैं। ऐसे में जांच का असर केवल अधिकारियों और बिल्डरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे फ्लैट खरीदारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जबकि खरीदारों के हितों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

ईडी की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है और कई पूर्व तथा वर्तमान अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर नए खुलासे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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