क्या बुढ़ापा रोका जा सकेगा? उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने वाली तकनीकों पर रूस का बड़ा दांव

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मॉस्को, 01 जून्‌ 2026 । रूस में वैज्ञानिक और जैव-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ उम्र बढ़ने (Aging) की प्रक्रिया को धीमा करने और स्वस्थ जीवनकाल बढ़ाने से जुड़ी नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। हाल के वर्षों में रूस सहित दुनिया के कई देशों में एंटी-एजिंग रिसर्च, जीन थेरेपी, सेलुलर रिपेयर और पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है। इसका उद्देश्य केवल जीवन की अवधि बढ़ाना नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों को कम करना भी है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है।

‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में मिनी-पिग्स (विशेष प्रजाति के सुअर) के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में जीन थेरेपी, लैब में इंसानी अंग तैयार करना और बेहद कम तापमान वाली क्रायोथेरेपी जैसी तकनीकों पर भी काम होगा।

रूसी सरकार का दावा है कि इस मिशन का मकसद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और दशक के अंत तक करीब 1.75 लाख लोगों की जान बचाना है।

रूस में कुछ अनुसंधान संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जीन एडिटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) के संयोजन से ऐसे समाधान विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो भविष्य में उम्र संबंधी रोगों के उपचार में मदद कर सकें। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि “बुढ़ापा रोकने” का दावा अभी वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है और अधिकांश तकनीकें अभी शोध या परीक्षण चरण में हैं।

दुनियाभर में वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अब “लंबी उम्र” की बजाय “स्वस्थ उम्र” (Healthy Aging) पर अधिक है। लक्ष्य यह है कि लोग अधिक समय तक सक्रिय, स्वस्थ और स्वतंत्र जीवन जी सकें। इस दिशा में रूस, अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और अन्य देशों में बड़े पैमाने पर अनुसंधान जारी है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में ऐसी कोई प्रमाणित तकनीक उपलब्ध नहीं है जो इंसानों में बुढ़ापे को पूरी तरह रोक सके। लेकिन बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में शोध लगातार आगे बढ़ रहा है।

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