गुरदासपुर नगर परिषद चुनावों पर हाईकोर्ट सख्त: निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए जारी किए अहम निर्देश

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गुरदासपुर, 27 मई 2026 । पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरदासपुर में होने वाले नगर परिषद चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से अदालत ने प्रशासन और चुनाव अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।

डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस हरसिमरण सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा शामिल थे, ने बलजीत सिंह, सुखविंदर पाल सिंह और परमिंदर सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

मामला चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं से जुड़ा बताया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव बेहद जरूरी हैं। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, दबाव या प्रशासनिक लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि मतदान केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों की विशेष निगरानी करने के आदेश भी दिए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी उम्मीदवार या समर्थक द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मतदाताओं को किसी भी तरह का डर या दबाव महसूस न हो। वोटिंग प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए CCTV निगरानी, वीडियोग्राफी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने पर भी जोर दिया गया है।

राजनीतिक दलों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अदालत के हस्तक्षेप से चुनाव प्रक्रिया में भरोसा बढ़ेगा, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने भी निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में विवाद और तनाव की घटनाओं के बाद इस बार प्रशासन पर निष्पक्ष चुनाव कराने की बड़ी जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब सभी की नजर चुनाव आयोग और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि निर्देशों का सख्ती से पालन होता है तो चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सकते हैं।

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