“योगी सरकार ने नकल माफिया की कमर तोड़ दी, इसलिए बौखलाए हैं अखिलेश” — असीम अरुण का सपा पर तीखा हमला

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लखनऊ, 21 मई 2026 । उत्तर प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों स्वतंत्र देव सिंह और असीम अरुण ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में नकल माफिया पर कड़ी कार्रवाई कर उनकी कमर तोड़ दी है, यही वजह है कि अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी बौखलाई हुई है। उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

भर्ती निकलते ही झोला लेकर निकल जाते थे चाचा-भतीजा

जल शक्ति विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जब-जब नियुक्तियों और रोजगार के विज्ञापन निकलते थे, तब-तब चाचा-भतीजा लूट के लिए झोला लेकर निकल जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर भर्ती तक हर जगह खुला रेट चलता था और बिना पैसे व सिफारिश के कोई काम नहीं होता था। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में लगभग 9 लाख सरकारी भर्तियां पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई हैं। समाज के सभी वर्गों के युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज हर गांव में 4-5 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। न जातिवाद चला, न क्षेत्रवाद। केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ।

असीम अरुण ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन मौजूदा सरकार ने सख्त कानून और तकनीकी निगरानी के जरिए इस नेटवर्क पर बड़ी चोट की है। उन्होंने दावा किया कि अब परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

भाजपा नेता ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों को पहले नकल माफिया से राजनीतिक या अन्य लाभ मिलता था, वही अब सरकार की कार्रवाई से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और युवाओं को ईमानदारी से आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है।

वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से भाजपा सरकार पर पलटवार भी देखने को मिला। सपा नेताओं का कहना है कि सरकार बेरोजगारी, महंगाई और भर्ती परीक्षाओं में देरी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक बयानबाजी कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि युवाओं को अब भी रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाएं और पेपर लीक का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सरकार का दावा है कि इससे नकल और पेपर लीक की घटनाओं में कमी आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए शिक्षा, युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाएंगे। भाजपा और सपा दोनों ही दल इन मुद्दों पर एक-दूसरे को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

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