आरक्षण मुद्दे पर अखिलेश यादव का BJP पर बड़ा हमला, PDA फॉर्मूले के जरिए फिर साधा सामाजिक समीकरण
लखनऊ , 20 मई 2026 । समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने अपने चर्चित PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को दोबारा प्रमुखता देते हुए सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा, ”पीडीए ऑडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा।” यादव ने जून 2023 में ‘पीडीए’ शब्द गढ़ा था जिसका उनके अनुसार अभिप्राय है ”पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक”। सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो “यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भर्तियों, शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में आरक्षण से जुड़े अधिकारों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। सपा प्रमुख ने दावा किया कि PDA समाज के उन वर्गों की आवाज है जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक रूप से मजबूत प्रतिनिधित्व की जरूरत है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने युवाओं, पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों से एकजुट होने की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा आगामी चुनावों को देखते हुए PDA रणनीति के जरिए बड़े सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है।
वहीं भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव के आरोपों को राजनीतिक बयानबाज़ी करार दिया है। भाजपा का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें संविधान के दायरे में रहकर सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही हैं और आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा हमेशा से बेहद अहम रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव का यह बयान आने वाले चुनावी माहौल में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।