पुतिन-जिनपिंग की बड़ी रणनीति, डॉलर को खुली चुनौती; अब रूबल और युआन में होगा तेल-गैस कारोबार
वॉशिंगटन, 19 मई 2026 । ,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को लेकर बड़ा संकेत देते हुए अमेरिकी डॉलर के दबदबे को खुली चुनौती दी है। दोनों देशों ने ऊर्जा व्यापार में डॉलर की जगह रूबल और युआन के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने का फैसला किया है। इस कदम को दुनिया की बदलती आर्थिक ताकतों और “डी-डॉलराइजेशन” की दिशा में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस और चीन के बीच होने वाले अधिकांश तेल और गैस सौदों में अब अमेरिकी डॉलर का उपयोग कम किया जा रहा है। दोनों देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं—रूसी रूबल और चीनी युआन—में भुगतान प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति पश्चिमी प्रतिबंधों के असर को कम करने और अमेरिकी वित्तीय प्रभाव से बाहर निकलने की कोशिश का हिस्सा है।
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद मॉस्को ने वैकल्पिक वित्तीय नेटवर्क और नई भुगतान व्यवस्था पर तेजी से काम शुरू किया। चीन ने भी इस रणनीति में रूस का साथ दिया और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग लगातार बढ़ता गया। अब ऊर्जा क्षेत्र में स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल वैश्विक बाजार में नई आर्थिक धुरी तैयार कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बड़े तेल उत्पादक और आयातक देश डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं में व्यापार बढ़ाते हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की पकड़ कमजोर पड़ सकती है। यही वजह है कि रूस-चीन की यह साझेदारी अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौती मानी जा रही है।
हालांकि आर्थिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि डॉलर अभी भी दुनिया की सबसे मजबूत रिजर्व करेंसी है और वैश्विक व्यापार में उसकी हिस्सेदारी बेहद बड़ी है। लेकिन रूस और चीन जैसे बड़े देशों की यह पहल आने वाले वर्षों में वैश्विक वित्तीय ढांचे में बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।
इस घटनाक्रम पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि ऊर्जा कारोबार में मुद्रा परिवर्तन का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल कीमतों, विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक राजनीति तक देखने को मिल सकता है।