भारत–रूस साझेदारी: यूरिया फैक्ट्री लगाने की तैयारी, कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा सहारा

0

नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026 । भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा अब कृषि क्षेत्र तक और मजबूत होने जा रहा है। दोनों देशों ने मिलकर यूरिया उत्पादन के लिए नई फैक्ट्री स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

ईरान जंग के कारण पैदा हुए यूरिया संकट के बीच भारत और रूस ने जॉइंट वेंचर में फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी हैं। यह प्लांट रूस के समारा में लगाया जा रहा है, जो अगले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इसे लेकर हाल ही में एक भारतीय दल ने रूस का दौरा किया है।

भारत और रूस के इस साझा प्रोजेक्ट में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना है। रूस में लगने वाले 20 लाख टन क्षमता के यूरिया प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड, RCF और NFL शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है।

यह परियोजना भारत के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि देश में कृषि के लिए यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। रूस के साथ साझेदारी से कच्चे माल की उपलब्धता, तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को समय पर सस्ती खाद मिल सकेगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित फैक्ट्री अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित होगी, जिससे उत्पादन लागत कम और गुणवत्ता बेहतर होगी। साथ ही, यह परियोजना रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगी।

रणनीतिक रूप से भी यह समझौता अहम है, क्योंकि भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा और अब कृषि क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। यह साझेदारी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं भारत के कृषि क्षेत्र को लंबे समय तक स्थिरता प्रदान करेंगी और किसानों की लागत कम करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.